उमरिया, 23 जून।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मंगलवार सुबह सिवनी से लाई गई एक मादा बाघिन को सुरक्षित रूप से मगधी रेंज स्थित बहेरहा बाड़े में रखा गया। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार निर्धारित निगरानी और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद उसे प्राकृतिक वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन के मुताबिक यह मादा बाघ शावक सिवनी जिले के दक्षिण वन मंडल क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति से जुड़ी हुई थी। बाघिन लंबे समय से गांवों के आसपास देखी जा रही थी, जिससे स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ गई थी। स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने सोमवार को विशेष अभियान चलाकर उसे पिंजरे की सहायता से सुरक्षित रेस्क्यू किया।
रेस्क्यू के बाद वन विभाग और वन्य प्राणी स्वास्थ्य विशेषज्ञों की निगरानी में बाघिन को सिवनी से बांधवगढ़ लाया गया। मंगलवार सुबह अधिकारियों और वन अमले की मौजूदगी में उसे बहेरहा बाड़े में छोड़ा गया, जहां उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
अधिकारियों ने बताया कि बाड़े में पहुंचने के बाद बाघिन की स्थिति सामान्य पाई गई है। वह पूरी तरह स्वस्थ दिखाई दी और सहज रूप से विचरण करती नजर आई। अब उसकी वैज्ञानिक पद्धति से देखरेख की जाएगी तथा वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में उचित समय आने पर उसे खुले जंगल में छोड़ा जाएगा।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन लंबे समय से मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित, घायल अथवा विशेष संरक्षण की आवश्यकता वाले बाघों के पुनर्वास और संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य वन्यजीवों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और उन्हें प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापित करना है।
वन विशेषज्ञों का मानना है कि जंगल में छोड़े जाने के बाद बाघिन के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती अपनी नई टेरेटरी स्थापित करने की होगी। इस दौरान उसकी गतिविधियों पर निगरानी बनाए रखना आवश्यक रहेगा। विशेषज्ञों के अनुसार यदि बाघिन सफलतापूर्वक अपने नए क्षेत्र में अनुकूलन कर लेती है, तो यह क्षेत्र में बाघ संरक्षण प्रयासों को और मजबूती प्रदान कर सकती है।










