उलानबातर, 23 जून।
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 22-23 जून को हुई अपनी मंगोलिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को नई गति देने के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक विषयों पर व्यापक चर्चा की। यह दौरा मंगोलिया की विदेश मंत्री बी. बत्त्सेत्सेग के आमंत्रण पर संपन्न हुआ।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यात्रा के दौरान जयशंकर ने अपनी समकक्ष बी. बत्त्सेत्सेग तथा कैबिनेट सचिवालय प्रमुख बी. एन्खबयार के साथ विस्तृत बातचीत की। उन्होंने मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना से शिष्टाचार मुलाकात की। इसके अलावा संसद अध्यक्ष एस. ब्याम्बात्सोग्त और शिक्षा मंत्री एल. एन्ख-अम्गालन से भी भेंट कर विभिन्न विषयों पर विचार साझा किए।
बैठकों में अक्टूबर 2025 में मंगोलियाई राष्ट्रपति की भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच हुए विकास की समीक्षा की गई। साथ ही रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने विकास सहयोग, व्यापार, शिक्षा, संस्कृति, क्षमता निर्माण, आपूर्ति शृंखला, खनन, महत्वपूर्ण खनिज, रक्षा, हवाई संपर्क तथा जन-से-जन संबंधों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
विदेश मंत्री ने डोर्नोगोवी प्रांत के अल्तानशिरी क्षेत्र में भारत की सहायता से विकसित की जा रही तेल रिफाइनरी परियोजना का निरीक्षण भी किया। इस अवसर पर मंगोलिया के विदेश मंत्री और उद्योग एवं खनिज संसाधन मंत्री गोंगोर डामडिनन्याम भी मौजूद रहे। परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए जयशंकर ने सामाजिक मंच एक्स पर कहा कि भारत-मंगोलिया मैत्री का यह महत्वपूर्ण प्रकल्प निरंतर आगे बढ़ रहा है तथा विभिन्न टीमों द्वारा किए जा रहे कार्यों की स्थिति का आकलन किया गया।
यात्रा के दौरान उन्होंने उलानबातर स्थित ऐतिहासिक गंडन मठ में भी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने इसे भारत और मंगोलिया के बीच विशेष आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक बताया। जयशंकर ने मठ में भारत के सहयोग से संचालित बौद्ध पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण कार्य का अवलोकन किया और संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि एक मिलियन बौद्ध पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण की परियोजना पर काम प्रगति पर है तथा भारत इस मठ को भविष्य में भी सहयोग देता रहेगा।










