कोलकाता, 02 जुलाई।
तृणमूल कांग्रेस के वर्चस्व को लेकर छिड़ी आंतरिक जंग अब एक निर्णायक पड़ाव पर आ गई है। पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर नियंत्रण पाने की होड़ में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी गुट आज नई दिल्ली में भारत निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ के समक्ष अपनी दलीलें पेश करेगा। बागी विधायकों ने इस कानूनी लड़ाई में अपना दावा और पुख्ता करने के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज आयोग को पहले ही सौंप दिए हैं।
यह विवाद तब और विकराल हो गया जब 22 जून को बागी खेमे ने खुद को संगठित करते हुए एक नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया। इसमें ममता बनर्जी को हटाकर अरूप राय को कमान सौंपने का बड़ा फैसला लिया गया, जिससे दोनों गुटों के बीच संगठनात्मक और कानूनी संघर्ष अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया। बागी खेमे का दावा है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा के 80 में से 60 से अधिक विधायकों का उन्हें समर्थन प्राप्त है।
अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए बागी गुट ने तर्क दिया है कि उसके पास मौजूद विधायकों के मतों का गणित निर्वाचन आयोग के मानदंडों को पूरा करता है। उनका कहना है कि उनके पक्ष में 48 लाख से अधिक मत हैं, जो ममता बनर्जी खेमे के समर्थन से कहीं अधिक हैं। इसी सांख्यिकीय आधार पर वे पार्टी की विरासत पर अपना हक जता रहे हैं।
अब पूरे देश की निगाहें निर्वाचन आयोग की इस महत्वपूर्ण सुनवाई पर टिकी हैं। आयोग के फैसले से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि असली तृणमूल कांग्रेस किसकी है और चुनाव चिह्न का असली वारिस कौन बनेगा। दोनों पक्षों की दलीलों और कानूनी तथ्यों के गहन परीक्षण के बाद ही आयोग अपनी अंतिम मुहर लगाएगा, जो राज्य की सियासत की दिशा तय करेगा।
















