नई दिल्ली, 02 जुलाई।
भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाची के बीच नई दिल्ली में आयोजित वार्षिक शिखर सम्मेलन में आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा, रक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे अहम क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लगी है। दोनों देशों ने वैश्विक चुनौतियों और आपसी सहयोग को और अधिक मजबूती देने पर विस्तार से चर्चा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने साझा प्रेस वार्ता में कहा कि भारत और जापान की साझेदारी समय की कसौटी पर खरी उतरी है और आपसी विश्वास इस रिश्ते की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक अब भारत-जापान सहयोग का सबसे प्रमुख स्तंभ बनेगी। इस दिशा में दोनों देशों ने एआई (AI) के क्षेत्र में एक संयुक्त बयान जारी किया है, जो वैश्विक स्तर पर प्रौद्योगिकी विकास को नई गति प्रदान करेगा। भारत की सॉफ्टवेयर शक्ति और जापान की सटीक तकनीक का तालमेल भविष्य के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।
रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। पहली बार भारत और जापान ने एक साझा रक्षा सहयोग परियोजना (Co-development project) पर हस्ताक्षर किए हैं। वहीं, ऊर्जा सुरक्षा के लिए इंडिया-जापान बायोगैस इनिशिएटिव की शुरुआत की गई है, जिसके तहत देश भर में एक हजार बायोगैस और जैविक उर्वरक संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। यह पहल न केवल टिकाऊ ऊर्जा को बढ़ावा देगी, बल्कि ग्रामीण भारत में आजीविका के नए अवसर भी पैदा करेगी।
प्रधानमंत्री ताकाची का यह भारत का पहला आधिकारिक दौरा है। इससे पहले उनका राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में औपचारिक स्वागत किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत-जापान की 'स्पेशल स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप' को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज और स्वच्छ ऊर्जा जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग भविष्य में दोनों अर्थव्यवस्थाओं को और अधिक पूरक बनाएगा।
















