काठमांडू, 02 जुलाई।
नेपाल के अध्यागमन विभाग ने राजधानी में संदिग्ध गतिविधियों के आरोप में 9 चीनी नागरिकों को हिरासत में लिया है। विभाग को सूचना मिली थी कि ललितपुर के धोबीघाट स्थित एक मकान में विदेशी नागरिक गैर-कानूनी कार्य कर रहे हैं, जिसके बाद बुधवार रात छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में धोबीघाट से 3 और चोभार क्षेत्र से 6 लोगों को पकड़ा गया। विभाग ने जांच के लिए कुल 18 चीनी पासपोर्ट भी अपने कब्जे में लिए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, धोबीघाट के चार मंजिला भवन में 29 चीनी लोग रह रहे थे, जिनमें से टीम को 22 नागरिक मिले। इनमें 11 पुरुष और 11 महिलाएं शामिल थीं। हालांकि सभी के पास वैध वीजा मौजूद थे, लेकिन 4 लोगों ने पासपोर्ट वकील के पास होने का बहाना बनाया। यह भवन ड्रैगन ब्रिज इंटरनेशनल नामक कंपनी ने किराए पर लिया था। निरीक्षण में सामने आया कि इसे एक हॉस्टल के रूप में दिखाया गया था, लेकिन वहां कोई कानूनी पंजीकरण नहीं पाया गया। साथ ही वहां के संचालकों कर्मा शेर्पा और मंजु लामा के पास विदेशी नागरिकों का कोई विवरण उपलब्ध नहीं था।
जांच में पता चला कि अधिकांश चीनी नागरिक पर्यटक वीजा पर थे और चोभार स्थित ट्रेजर्स प्रालि तथा ड्रैगन ब्रिज इंटरनेशनल के लिए काम कर रहे थे। विभाग के प्रवक्ता टीकाराम ढकाल ने स्पष्ट किया कि ये लोग वीजा नियमों का उल्लंघन कर कार्य कर रहे थे। चोभार स्थित कंपनी के दफ्तर में अत्यधिक सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी का जाल बिछा हुआ था। वहां आम लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित था और कर्मचारियों ने पहचान पत्र दिखाने से भी इनकार कर दिया।
भवन के अंदर कई कमरों पर “टूरिस्ट प्रोहिबिटेड” के स्टिकर चस्पा थे। पुलिस को एक अंधेरे कमरे में 7 चीनी नागरिक छिपे मिले, जिनमें से 5 को पकड़ लिया गया और 2 भागने में सफल रहे। प्रवक्ता के अनुसार, इन लोगों के क्रिप्टो कारोबार में संलिप्त होने की प्रबल आशंका है। धोबीघाट स्थित आवास को रहने के लिए और चोभार स्थित इकाई को काम करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। इस स्थान का पुराना रिकॉर्ड भी दागदार रहा है, क्योंकि पूर्व में यहां से इंडोनेशियाई नागरिकों को धार्मिक गतिविधियों में पकड़े जाने के बाद निष्कासित किया गया था।
















