कोलकाता, 10 जुलाई।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने चुनाव प्रचार के दौरान कथित 'डीजे' टिप्पणी से जुड़े मामले में तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अभिषेक बनर्जी को जांच में सहयोग करते हुए अपना वॉयस सैंपल (आवाज का नमूना) देना ही होगा। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि वह सहयोग नहीं करते हैं, तो उन्हें दी गई अंतरिम राहत वापस ले ली जाएगी और सीआईडी उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। अदालत के अनुसार, पिछली सुरक्षा शर्तों में जांच में पूर्ण सहयोग अनिवार्य था, जिसके तहत जांच एजेंसी द्वारा मांगे गए वॉयस सैंपल को देने से इनकार नहीं किया जा सकता। अभिषेक बनर्जी का तर्क था कि वह संबंधित आवाज को अपनी स्वीकार कर चुके हैं, इसलिए नमूना देने की आवश्यकता नहीं है, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।
अभिषेक बनर्जी के वकील ने बाद में अदालत को आश्वस्त किया कि उनके मुवक्किल निर्धारित समय पर मजिस्ट्रेट के समक्ष वॉयस सैंपल देने के लिए उपस्थित होंगे। साथ ही, उन्होंने अदालत से सुरक्षा की गुहार लगाई, जिस पर पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना (जैसे अंडे फेंकने आदि) को हर हाल में रोका जाए और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। वकील ने अदालत के आदेश को समझने में हुई अपनी गलती को स्वीकार करते हुए संबंधित याचिका वापस लेने की अनुमति भी मांगी।








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