बुशहर, 10 जुलाई।
दक्षिणी ईरान का बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र आज भीषण धमाकों से दहल उठा। इस घटना ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव को और गहरा दिया है। परमाणु संयंत्र के पास हुए इन शक्तिशाली विस्फोटों से रेडियोधर्मी रिसाव की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
यह संयंत्र फारस की खाड़ी के तट पर स्थित है। इसे 1970 के दशक में जर्मन कंपनियों ने शुरू किया था और बाद में रूस की मदद से पूरा किया गया। यह ईरान का एकमात्र सक्रिय परमाणु संयंत्र है, जो राष्ट्रीय ग्रिड को करीब 1000 मेगावॉट बिजली देता है।

स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, धमाके संयंत्र के बेहद करीब सुरक्षा घेरे, चोगादक सैन्य अड्डे और तटीय इलाकों में हुए हैं। गौरतलब है कि इससे पहले मार्च महीने में भी इस संयंत्र को निशाना बनाया गया था।
अमेरिका ने इन हमलों में अपनी किसी भी भूमिका से स्पष्ट इनकार किया है। वाशिंगटन का कहना है कि वे ईरान के साथ तकनीकी बातचीत जारी रखने और तनाव कम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मध्यस्थों द्वारा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति और इजराइली प्रधानमंत्री के बीच बातचीत हुई है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी कदमों और समन्वय पर चर्चा की गई है। इस हमले के पीछे इजराइल का हाथ होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि अभी तक किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है।








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