मेलबर्न, 09 जुलाई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के बीच तीसरे वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद व्यापार, रक्षा और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाई देने का संकल्प लिया गया है। दोनों नेताओं ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ बनाने पर सहमति व्यक्त की है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया लोकतंत्र और साझा मूल्यों के आधार पर जुड़े हुए हैं। उन्होंने एंथनी अल्बनीज़ के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच का आपसी विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।
व्यापार और निवेश बढ़ाने के उद्देश्य से दोनों पक्षों ने व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते को जल्द पूरा करने पर जोर दिया है। ईसीटीए के बाद से दोनों देशों के बीच आर्थिक गतिविधियों में हुई बढ़ोतरी को भी उन्होंने उत्साहजनक बताया है।
परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में हुए नए समझौते से भारत को यूरेनियम की आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को बल मिलेगा। इसके साथ ही, रक्षा स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए डिफेंस इनोवेशन कॉरिडोर और समुद्री सुरक्षा के लिए साझा रोडमैप तैयार किया गया है।
आतंकवाद को मानवता के लिए बड़ा खतरा बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके खिलाफ लड़ाई में दोनों देश साथ हैं। उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और नियम-आधारित व्यवस्था को बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
शिक्षा क्षेत्र में भी नई पहल की गई है, जिसके तहत ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के योगदान को सराहा गया है। भारत में ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों के आने से दोनों देशों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान और अधिक सुगम हो जाएगा।














