मेलबर्न, 10 जुलाई।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा को लेकर एक ऐतिहासिक करार हुआ है। मेलबर्न में आयोजित वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मौजूदगी में यह समझौता संपन्न हुआ।
अब ऑस्ट्रेलिया का पेटेंट कार्यालय भारत की डिजिटल लाइब्रेरी यानी टीकेडीएल डेटाबेस का उपयोग करने में सक्षम होगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारतीय चिकित्सा पद्धतियों पर गलत तरीके से पेटेंट लेने की कोशिशों पर रोक लगाना है।
टीकेडीएल का उपयोग कर ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी किसी भी नए पेटेंट आवेदन की जांच कर सकेंगे। यदि कोई आवेदन भारत के प्राचीन ज्ञान पर आधारित पाया जाता है, तो उस पर पेटेंट नहीं दिया जाएगा।
यह बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को नई मजबूती प्रदान करेगा। अब तक 18 देशों के पेटेंट कार्यालय टीकेडीएल का उपयोग कर रहे हैं, जिसकी मदद से 375 से अधिक गलत दावों को खारिज किया जा चुका है।
वर्ष 2001 में सीएसआईआर और आयुष मंत्रालय द्वारा तैयार इस डेटाबेस में 5.2 लाख से अधिक नुस्खे दर्ज हैं। इन्हें कई विदेशी भाषाओं में अनुवादित किया गया है ताकि दुनिया भर के विशेषज्ञ इन्हें आसानी से समझ सकें।








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