ग्वालियर, 10 जुलाई।
इतिहास के पन्नों में 10 जुलाई का दिन महिला सशक्तिकरण की एक गौरवशाली गाथा के रूप में दर्ज है। इसी दिन वर्ष 1964 में मध्य प्रदेश के ग्वालियर में देश की पहली महिला एनसीसी अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी की नींव रखी गई थी। इस कदम ने महिलाओं के लिए सैन्य नेतृत्व की राह प्रशस्त कर उन्हें नई उड़ान दी।
वर्ष 1965 में इस अकादमी से महिला अधिकारियों का पहला बैच पास आउट हुआ था। समय के साथ बदलाव करते हुए वर्ष 1982 में इसे ऑफिसर ट्रेनिंग स्कूल (ओटीएस) का स्वरूप दिया गया। आज भी यह केंद्र महिला अधिकारियों को बेहतरीन सैन्य प्रशिक्षण देने के लिए देशभर में अपनी पहचान बनाए हुए है।
यहाँ महिला कैडेट्स को भारतीय सशस्त्र बलों की तर्ज पर कठोर अभ्यास से गुजरना पड़ता है। तीन महीने की इस कठिन अवधि में उन्हें हथियारों के संचालन, युद्ध कौशल, फील्ड क्राफ्ट और नेतृत्व क्षमता जैसी बारीकियां सिखाई जाती हैं। कैडेट्स को दुर्गम जंगलों में लंबी पैदल मार्च और भारी उपकरणों के साथ अभ्यास करना होता है, जिसके बाद उन्हें अधिकारी के रूप में कमीशन मिलता है।
एनसीसी वर्तमान में देश का सबसे बड़ा युवा संगठन है, जिसमें करीब 18 से 20 लाख युवा अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ रहे हैं। ग्वालियर स्थित इस केंद्र ने रक्षा और नेतृत्व के क्षेत्र में महिलाओं के लिए न केवल नए अवसर सृजित किए हैं, बल्कि यह संस्थान आज भी राष्ट्र निर्माण का एक प्रेरणादायक प्रतीक बना हुआ है।








.jpg)
