मुंबई, 11 जुलाई।
बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी ने फिल्मों से दूरी बनाए रखने की वजह साझा करते हुए कहा कि भारतीय सिनेमा का वह दौर, जिसमें उन्होंने काम किया, बेहद खास था। उनका कहना है कि समय के साथ फिल्मों के निर्माण और प्रस्तुति का तरीका पूरी तरह बदल गया है, जिसके कारण नए दौर के सिनेमा के साथ खुद को सहज महसूस नहीं कर पातीं।
एक बातचीत में हेमा मालिनी ने कहा कि वह स्वयं को सौभाग्यशाली मानती हैं कि उन्हें भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम दौर का हिस्सा बनने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि उस समय महिलाओं पर आधारित कई प्रभावशाली फिल्में बनती थीं। उन्हें 'सीता और गीता', 'सपनों का सौदागर' और 'खुशबू' जैसी फिल्मों में अभिनय करने का अवसर मिला, जिन्हें आज भी दर्शकों का भरपूर प्रेम मिलता है।
अभिनेत्री ने बताया कि अपने लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने करीब 200 फिल्मों में काम किया और कई निर्माता-निर्देशकों के साथ बार-बार काम करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि उस समय फिल्मों में पांच से छह गीत होते थे और संगीत किसी भी फिल्म की सफलता का महत्वपूर्ण आधार माना जाता था। उनके अनुसार आज फिल्मों की शैली, प्रस्तुति और निर्माण प्रक्रिया पूरी तरह बदल चुकी है। इसी वजह से उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली।
हेमा मालिनी ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां को देते हुए कहा कि उन्होंने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया और सही निर्णय लेने में हमेशा साथ दिया। उन्होंने कहा कि नृत्य की शिक्षा से लेकर फिल्मी करियर तक उनकी मां का विश्वास और सहयोग ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा। अभिनेत्री के अनुसार उनके जीवन और करियर को संवारने में उनकी मां की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है।












