इस्लामाबाद, 22 जुलाई।
हिंदू कुश पर्वतमाला में पर्वतारोहियों ने रचा नया इतिहास, 27 साल बाद खुला दुर्गम फारगाम आन दर्रा। महिला पर्वतारोहियों ने भी पहली बार इस खतरनाक रास्ते की चढ़ाई पूरी की है।
यह ऐतिहासिक दर्रा ऊपरी चित्राल की लासपुर घाटी और निचली चित्राल की गोलैन घाटी को आपस में जोड़ता है। इस अभियान में शामिल दल ने लगभग 5100 मीटर की ऊंचाई को सफलतापूर्वक पार किया है।
खैबर पख्तूनख्वा संस्कृति एवं पर्यटन प्राधिकरण के सहयोग से हुए इस अभियान में ग्लेशियरों और बर्फीली ढलानों जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कामरान खान इस चोटी पर सबसे पहले पहुंचने वाले व्यक्ति बने हैं।
मेहरुश अख्तर समेत कई साहसी महिलाओं ने इसमें भाग लिया। जलवायु परिवर्तन और बदलते मौसम के कारण इस मार्ग की भौगोलिक स्थिति में काफी बदलाव आ चुका है।
इस यात्रा के दौरान ऑस्ट्रियाई पर्वतारोही जॉर्ज क्रोनबर्गर की स्मृति से जुड़ा एक मेमोरियल प्लाक भी मिला। यह पूरा अभियान 'तिरिच मीर प्रोजेक्ट' का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है।











