मुंबई, 25 जुलाई।
देश में डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ रहा है। हर दिन करोड़ों लोग मोबाइल से बैंकिंग कर रहे हैं, ऑनलाइन पेमेंट कर रहे हैं, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और यूपीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी के साथ ग्राहकों के डाटा की सुरक्षा का सवाल भी बड़ा हो गया है। ग्राहक का नाम, पता, मोबाइल नंबर, बैंक डिटेल्स और लेनदेन की जानकारी, यह सब कुछ बैंकों के पास होता है। अब भारतीय रिजर्व बैंक ने तय किया है कि बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं को ग्राहकों के डाटा की सुरक्षा और बेहतर तरीके से करनी होगी। आरबीआई ने डाटा गवर्नेंस को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं, जिनका मकसद ग्राहकों के डाटा को सुरक्षित रखना और उसका दुरुपयोग रोकना है। आरबीआई का कहना है कि डाटा अब बैंक की संपत्ति नहीं है, बल्कि यह ग्राहक की संपत्ति है। इसलिए बैंक ग्राहक की अनुमति के बिना डाटा का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
नए नियम के तहत बैंकों को डाटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क बनाना होगा। इस फ्रेमवर्क में यह तय होगा कि डाटा कैसे इकट्ठा किया जाएगा, कैसे रखा जाएगा और कैसे इस्तेमाल किया जाएगा। बैंकों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ग्राहक का डाटा सुरक्षित रहे और किसी तीसरे पक्ष के पास न जाए। आरबीआई ने कहा है कि डाटा की सुरक्षा को लेकर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पिछले कुछ वर्षों में साइबर धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़े हैं। फोन कॉल करके बैंक की जानकारी मांगी जाती है, लिंक भेजकर ओटीपी मांगा जाता है और ग्राहकों के खाते से पैसे उड़ा लिए जाते हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण डाटा का लीक होना है। कई बार बैंक और अन्य संस्थाओं से डाटा लीक हो जाता है और उसका गलत इस्तेमाल होता है। आरबीआई का मानना है कि अगर डाटा की सुरक्षा पुख्ता होगी तो धोखाधड़ी के मामले कम होंगे।
नए निर्देश के बाद अब बैंकों की जिम्मेदारी बहुत बढ़ गई है। बैंक को ग्राहक से स्पष्ट अनुमति लेनी होगी। बिना अनुमति के ग्राहक का डाटा किसी को नहीं दिया जा सकता। बैंक को डाटा को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत सिस्टम बनाना होगा। साइबर सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना होगा। अगर डाटा लीक होता है तो बैंक को तुरंत ग्राहक को सूचना देनी होगी। बैंक को नियमित रूप से ऑडिट कराना होगा, ताकि यह पता चल सके कि डाटा सुरक्षित है या नहीं।
इस नए नियम से ग्राहकों को सीधा फायदा मिलेगा। अब ग्राहक निश्चिंत होकर बैंकिंग कर सकेंगे। उनका डाटा सुरक्षित रहेगा, धोखाधड़ी का खतरा कम होगा। साथ ही ग्राहक को यह अधिकार मिलेगा कि वह जान सके कि उसका डाटा कहां इस्तेमाल हो रहा है और अगर वह चाहे तो डाटा के इस्तेमाल पर रोक भी लगा सके।
भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि हर लेनदेन डिजिटल हो, पर डिजिटल लेनदेन तभी सफल होगा जब लोगों को भरोसा होगा और भरोसा तभी आएगा जब डाटा सुरक्षित होगा। आरबीआई का यह कदम इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
नए नियम को लागू करना बैंकों के लिए आसान नहीं होगा। छोटे बैंक और सहकारी बैंकों के पास तकनीक और संसाधन कम होते हैं। उन्हें अपना सिस्टम अपग्रेड करना होगा। बड़े बैंकों को भी अपने पुराने सिस्टम में बदलाव करने होंगे। इसके लिए बैंकों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। स्टाफ को प्रशिक्षण देना पड़ेगा। पर आरबीआई का कहना है कि ग्राहक की सुरक्षा के लिए यह खर्च जरूरी है।
आरबीआई ने साइबर सुरक्षा को लेकर भी सख्त निर्देश दिए हैं। बैंकों को फायरवॉल, एंटीवायरस और एन्क्रिप्शन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करना होगा। साथ ही बैंक को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके कर्मचारी डाटा का गलत इस्तेमाल न करें। अगर कोई कर्मचारी डाटा लीक करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
आरबीआई ने ग्राहकों से भी अपील की है कि वे सावधान रहें। किसी को ओटीपी, पासवर्ड या कार्ड की जानकारी न दें। अनजान लिंक पर क्लिक न करें और बैंक की आधिकारिक वेबसाइट तथा ऐप का ही इस्तेमाल करें। साथ ही अगर कोई धोखाधड़ी होती है तो तुरंत बैंक और पुलिस को सूचना दें।
दुनिया के कई देशों में डाटा सुरक्षा को लेकर सख्त कानून हैं। यूरोप में जीडीपीआर कानून है, जिसके तहत कंपनियों को ग्राहकों के डाटा की सुरक्षा करनी होती है। भारत में भी अब इसी दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। आरबीआई का यह निर्देश उसी कड़ी का हिस्सा है।
बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि आरबीआई का यह कदम स्वागत योग्य है। इससे बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता आएगी, ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा और साइबर अपराध कम होंगे। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि नियम बनाने के साथ-साथ उन्हें लागू करना भी जरूरी है। नियम केवल कागजों तक सीमित न रहें।
आरबीआई ने बैंकों को छह महीने का समय दिया है। इस दौरान बैंकों को अपना डाटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क तैयार करना होगा। इसके बाद आरबीआई नियमित रूप से जांच करेगा और जो बैंक नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन पर जुर्माना लगाया जाएगा।
डिजिटल युग में डाटा ही सबसे बड़ी संपत्ति है और इस संपत्ति की सुरक्षा करना बैंक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। आरबीआई का यह नया निर्देश इसी जिम्मेदारी को याद दिलाता है। अब गेंद बैंकों के पाले में है। देखना यह है कि बैंक कितनी ईमानदारी से इन नियमों को लागू करते हैं। ग्राहकों को भी जागरूक रहना होगा और अपने डाटा की सुरक्षा के लिए खुद भी कदम उठाने होंगे, क्योंकि सुरक्षित डाटा ही सुरक्षित बैंकिंग की गारंटी है और सुरक्षित बैंकिंग ही मजबूत अर्थव्यवस्था की नींव है।













