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संपादकीय
25 Jul, 2026

10 मिनट की डिलीवरी ने छीनी बाजार की रौनक: पारंपरिक दुकानों पर मंडराया संकट, रोजगार पर भी खतरा

क्विक कॉमर्स के बढ़ते विस्तार ने पारंपरिक बाजारों की रौनक, छोटे व्यापारियों की आय और खुदरा कारोबार से जुड़े लाखों लोगों के रोजगार पर गहरा प्रभाव डालते हुए स्थानीय व्यापार के भविष्य और संतुलित नीति की आवश्यकता को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

नई दिल्ली, 25 जुलाई।

ऑनलाइन ऑर्डर करते ही 10 से 30 मिनट में घर के दरवाजे पर सामान पहुंचाने वाली सुविधा ने शहरों के बाजार का पूरा समीकरण बदल दिया है। दूध, ब्रेड, फल, सब्जी से लेकर दाल, चावल और दवाएं तक अब एक क्लिक पर उपलब्ध हैं। ग्राहकों के लिए यह सुविधा राहत लेकर आई है, लेकिन इसकी कीमत मोहल्ले की किराना दुकानों और पारंपरिक बाजारों को चुकानी पड़ रही है। शहर के तेल, शक्कर, दाल, चावल और किराना कारोबारियों का कहना है कि क्विक कॉमर्स के बढ़ते प्रभाव से करीब 70 प्रतिशत खुदरा व्यापार प्रभावित हुआ है। बाजारों की रौनक कम हो गई है, ग्राहकों का रुख बदल गया है और छोटा दुकानदार अब अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहा है।

ग्राहकों के लिए क्विक कॉमर्स किसी वरदान से कम नहीं है। भारी छूट, कैशबैक और फ्री डिलीवरी के कारण लोग बाजार जाना भूलते जा रहे हैं। पहले परिवार सप्ताह में एक बार बाजार जाकर महीने भर का सामान खरीदता था, लेकिन अब वही खरीदारी कई छोटे-छोटे ऑनलाइन ऑर्डरों में बंट गई है। रात में चायपत्ती खत्म हो जाए या सुबह टिफिन के लिए टमाटर चाहिए हो, कुछ ही मिनटों में सामान घर पहुंच जाता है। इस सुविधा ने लोगों की खरीदारी की आदत पूरी तरह बदल दी है, लेकिन इसके साथ एक बड़ा आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।

सबसे अधिक मार छोटे और मझोले दुकानदारों पर पड़ी है। कारोबारियों का कहना है कि दुकान का किराया, बिजली का बिल, नगर निगम का टैक्स और कर्मचारियों का वेतन पहले की तरह देना पड़ रहा है, जबकि बिक्री लगातार घट रही है। ग्राहक अब थोक में सामान खरीदने के बजाय रोजाना छोटे-छोटे ऑर्डर मोबाइल ऐप से कर रहा है। इससे अनेक व्यापारी आर्थिक दबाव में आ गए हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो स्थानीय बाजारों की रौनक खत्म होने लगेगी और उससे जुड़े लाखों लोगों की आजीविका भी प्रभावित होगी। एक किराना दुकान केवल एक परिवार का सहारा नहीं होती, बल्कि उससे जुड़े लोडिंग, पैकिंग, परिवहन और आपूर्ति का पूरा तंत्र भी रोजगार पाता है।

कारोबारियों ने सरकार की ई-कॉमर्स नीति पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विदेशी निवेश के नियमों में बदलाव के बाद बड़ी कंपनियों को तेजी से विस्तार का अवसर मिला, जबकि पारंपरिक व्यापार को बचाने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। उनका मानना है कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में शहरों का खुदरा बाजार कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित हो जाएगा और छोटे दुकानदारों का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा।

क्विक कॉमर्स कंपनियों की सबसे बड़ी ताकत उनकी भारी पूंजी, आधुनिक तकनीक और तेज डिलीवरी नेटवर्क है। अरबों रुपये के निवेश के बल पर वे शुरुआती नुकसान उठाकर भी कम कीमत पर सामान बेच रही हैं, ताकि ग्राहकों की खरीदारी की आदत बदल जाए। शहरों में हर दो से तीन किलोमीटर पर डार्क स्टोर बनाए गए हैं, जहां से चौबीसों घंटे डिलीवरी की जा रही है। कंपनियों के पास ग्राहकों की खरीदारी का विस्तृत डाटा होता है और उसी के अनुसार स्टॉक रखा जाता है। इसके मुकाबले पारंपरिक दुकानदार न तो इतनी पूंजी जुटा सकता है और न ही इतनी उन्नत तकनीक अपना सकता है।

देश में खुदरा व्यापार से लगभग सात करोड़ लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। एक छोटी दुकान औसतन तीन से चार लोगों को रोजगार देती है। कारोबारियों का दावा है कि क्विक कॉमर्स के विस्तार के बाद खुदरा बिक्री में 40 से 50 प्रतिशत तक गिरावट आई है। डिलीवरी बॉय को रोजगार जरूर मिला है, लेकिन वह अधिकतर अस्थायी और असुरक्षित है, जबकि पारंपरिक व्यापार स्थायी आजीविका का आधार रहा है।

इस स्थिति से निपटने के लिए कारोबारियों ने मांग की है कि क्विक कॉमर्स कंपनियों के डार्क स्टोर को भी खुदरा दुकानों की श्रेणी में लाकर उन पर समान नियम लागू किए जाएं। छोटे व्यापारियों को डिजिटल तकनीक अपनाने के लिए सस्ती वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण दिया जाए। साथ ही स्थानीय व्यापार को प्रोत्साहित करने वाली नीतियां बनाई जाएं।

क्विक कॉमर्स को रोका नहीं जा सकता, क्योंकि यह समय की मांग है, लेकिन इसका अर्थ यह भी नहीं कि पारंपरिक व्यापार को समाप्त होने दिया जाए। ग्राहक की सुविधा और स्थानीय व्यापार, दोनों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। बाजार केवल सामान खरीदने-बेचने की जगह नहीं होता, बल्कि वह विश्वास, सामाजिक संबंधों और लाखों लोगों की आजीविका का आधार भी होता है। यदि समय रहते संतुलित नीति नहीं बनाई गई, तो भविष्य में शहरों में बड़ी कंपनियों के डार्क स्टोर तो होंगे, लेकिन मोहल्लों की जीवंत बाजार संस्कृति धीरे-धीरे इतिहास बन जाएगी।

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आज का राशिफल

अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। नये-नये व्यापारिक अनुबंध होंगे। किसी से वाद-विवाद अथवा कहासुनी होने का भय रहेगा। मानसिक एवं शारीरिक शिथिलता पैदा होगी। जल्दबाजी में कोई भूल संभव है। आय-व्यय की स्थिति समान्य रहेगी। शुभांक-5-7-8

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