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संपादकीय
25 Jul, 2026

दक्षिणी कमान अलर्ट: मल्टी डोमेन युद्ध की तैयारी तेज

भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए मल्टी डोमेन युद्ध प्रणाली और आधुनिक तकनीकों के साथ अपनी तैयारियों को और अधिक मजबूत कर लिया है।

पुणे, 25 जुलाई।

देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने अपनी युद्ध क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। कमांडर ने हाल ही में कमान क्षेत्र का दौरा कर तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान मल्टी डोमेन युद्ध की संकल्पना और सुदर्शन चक्र कोर की तैयारियों पर विशेष जोर दिया गया।

दक्षिणी कमान सेना की सबसे बड़ी कमानों में से एक है। इसका जिम्मा पश्चिमी और दक्षिणी, दोनों क्षेत्रों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्वों का है। इसलिए यहां की हर तैयारी का सीधा असर देश की सुरक्षा पर पड़ता है।

आधुनिक युद्ध अब सिर्फ जमीन, हवा और समुद्र तक सीमित नहीं है। अब साइबर, अंतरिक्ष और सूचना युद्ध भी उतने ही अहम हो गए हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सेना ने मल्टी डोमेन युद्ध की रणनीति अपनाई है। कमांडर ने अधिकारियों से कहा कि आने वाले समय में युद्ध एक साथ कई मोर्चों पर लड़ा जाएगा, इसलिए सेना को हर क्षेत्र में पूरी तरह तैयार रहना होगा।

जमीन पर ताकत के साथ-साथ दुश्मन के साइबर नेटवर्क को भी निष्क्रिय करना होगा। अंतरिक्ष से निगरानी कर दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर रखनी होगी और सूचना युद्ध के माध्यम से उसके मनोबल को कमजोर करना होगा। उन्होंने कहा कि तकनीक अब युद्ध का सबसे बड़ा हथियार बन गई है। इसलिए दक्षिणी कमान में नई तकनीक और आधुनिक हथियारों को शामिल करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

दौरे के दौरान कमांडर ने सुदर्शन चक्र कोर का भी निरीक्षण किया। यह कोर दक्षिणी कमान की प्रमुख स्ट्राइक फोर्स है। युद्ध की स्थिति में यह सबसे पहले दुश्मन पर जवाबी कार्रवाई करने वाली इकाइयों में शामिल होती है। कमांडर ने जवानों से सीधे बातचीत की और उनके जोश की सराहना की। उन्होंने कहा कि सुदर्शन चक्र कोर की गति और ताकत देश की सुरक्षा की गारंटी है।

निरीक्षण के दौरान हथियारों, गोला-बारूद और संचार व्यवस्था की जांच की गई। सभी यूनिटों को 24 घंटे युद्ध के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए। सेना में आधुनिकीकरण का काम तेजी से चल रहा है। नए हथियार, नए वाहन और नई संचार प्रणालियां जवानों को उपलब्ध कराई जा रही हैं।

ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी सेना में शामिल किया जा रहा है। कमांडर ने कहा कि अब युद्ध में ड्रोन की भूमिका बहुत बढ़ गई है, इसलिए एंटी-ड्रोन सिस्टम को और मजबूत करना जरूरी है। साथ ही अपने ड्रोन के माध्यम से निगरानी और हमले की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी।

साइबर सुरक्षा को लेकर भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। सेना के सभी नेटवर्क को सुरक्षित किया जा रहा है, ताकि दुश्मन साइबर हमला न कर सके। सूचना युद्ध के लिए जवानों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

कमांडर ने जवानों से मुलाकात कर उनका मनोबल बढ़ाया। उन्होंने कहा कि आप लोगों की वजह से ही देश सुरक्षित है। आपकी मेहनत और त्याग को पूरा देश सलाम करता है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रशिक्षण का स्तर और ऊंचा किया जाए। हर जवान को नई तकनीक का ज्ञान हो और युद्ध जैसी परिस्थितियों का लगातार अभ्यास कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति में कोई चूक न हो।

जवानों के परिवारों के कल्याण पर भी जोर दिया गया। उनकी समस्याओं को प्राथमिकता से सुलझाने के आदेश दिए गए।

दक्षिणी कमान की जिम्मेदारी सिर्फ जमीन ही नहीं, बल्कि समुद्री तट की सुरक्षा भी है। पड़ोसी देशों की हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। कमांडर ने कहा कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए हम तैयार हैं। सीमा क्षेत्रों में नए रडार और सेंसर लगाए गए हैं। नौसेना और तटरक्षक बल के साथ समन्वय भी मजबूत किया गया है।

आधुनिक युद्ध के लिए मजबूत लॉजिस्टिक्स जरूरी है। इसलिए दक्षिणी कमान क्षेत्र में सड़कों, पुलों और हवाई पट्टियों का निर्माण तेजी से हो रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर सेना और हथियारों को तुरंत एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जा सके। कमांडर ने सभी निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की और समय पर उन्हें पूरा करने के निर्देश दिए।

भविष्य का युद्ध पूरी तरह बदल चुका है। अब बंदूक और टैंक के साथ साइबर हमले और मिसाइल हमले भी होंगे। इसलिए दक्षिणी कमान खुद को नई पीढ़ी के युद्ध के लिए तैयार कर रही है। नई तकनीक, नए हथियार और नया प्रशिक्षण इसके तीन मुख्य आधार हैं। कमांडर ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि दक्षिणी कमान देश की सबसे आधुनिक और सक्षम कमान बने।

दौरे के अंत में कमांडर ने शहीद स्मारक जाकर शहीदों को नमन किया। उन्होंने कहा कि शहीदों के बलिदान को हम कभी नहीं भूल सकते। उनके सपनों का भारत बनाने के लिए हम पूरी निष्ठा से काम करेंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जवानों के साथ मिलकर काम करें, उनकी हर समस्या को गंभीरता से सुनें और उसका समाधान करें।

दक्षिणी कमान का यह दौरा इस बात का प्रमाण है कि भारतीय सेना भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है। मल्टी डोमेन युद्ध, साइबर सुरक्षा और आधुनिक तकनीक पर फोकस करके सेना खुद को नए दौर के अनुरूप ढाल रही है। सुदर्शन चक्र कोर की मजबूती और जवानों का जोश इस बात की गारंटी है कि देश की सीमाएं सुरक्षित हैं। आज के समय में मजबूत सेना ही देश की सबसे बड़ी ताकत है और दक्षिणी कमान उस ताकत को और धार देने में जुटी है।

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