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संपादकीय
25 Jul, 2026

शह और मात का खेल, चुनावी दंगल में हल्लाबोल: दतिया की सियासी जंग में अपने ही काट रहे पैर, आपसी खींचतान दलों को कर रही बेनकाब

दतिया उपचुनाव में भाजपा की अंदरूनी खींचतान, कांग्रेस की सक्रियता और स्थानीय मुद्दों के बीच जनता का फैसला सभी दलों की राजनीतिक दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।

दतिया, 25 जुलाई।

दतिया विधानसभा उपचुनाव अब सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है। यह भाजपा के लिए साख की लड़ाई और कांग्रेस के लिए वापसी का अवसर बन गया है। मैदान में उभरती तस्वीर ने सत्ता पक्ष की चिंता बढ़ा दी है। कारण विपक्ष नहीं, बल्कि भीतर का बिखराव है। भाजपा ने सीट बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री से लेकर संगठन के शीर्ष पदाधिकारी लगातार दतिया के दौरे कर रहे हैं। बड़ी सभाएं हो रही हैं और वादों की झड़ी लगी है, लेकिन जमीन पर कार्यकर्ताओं का उत्साह दिखाई नहीं दे रहा। इसकी सबसे बड़ी वजह पार्टी के भीतर पनपी खींचतान है।

गड़बड़ी की शुरुआत टिकट वितरण से हुई। स्थानीय नेताओं और पुराने कार्यकर्ताओं की राय लिए बिना प्रत्याशी घोषित कर दिया गया। इससे पार्टी का एक बड़ा वर्ग खुद को उपेक्षित महसूस करने लगा। वर्षों से बूथ स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता आज मंच से दूर और मैदान से नदारद हैं। पार्टी में दो धड़े साफ दिखाई दे रहे हैं। एक प्रत्याशी के साथ औपचारिकता निभा रहा है, जबकि दूसरा मौन रहकर सब देख रहा है। कुछ नेता खुलकर नाराजगी भी जता चुके हैं। यही कारण है कि चुनाव प्रचार में वह धार नहीं दिख रही, जो किसी सत्ताधारी दल में होनी चाहिए।

राजनीति का पहला नियम है कि चुनाव कार्यकर्ता जिताता है। वही नाराज हो जाए तो बड़े नेता भी हार की ओर बढ़ने लगते हैं। भाजपा की इस अंदरूनी कलह ने कांग्रेस को बड़ा मुद्दा दे दिया है। कांग्रेस ने एकजुटता दिखाते हुए प्रचार तेज कर दिया है। उसके नेता घर-घर जाकर पूछ रहे हैं कि जिस पार्टी के लोग खुद एक नहीं हैं, वे जनता का भला कैसे करेंगे।

कांग्रेस के लिए यह सीट रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यदि दतिया में जीत मिलती है तो इसका संदेश पूरे बुंदेलखंड में जाएगा। विपक्ष का मनोबल बढ़ेगा और सरकार पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ेगा। सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेरोजगारी जैसे स्थानीय मुद्दों को चुनाव के केंद्र में रखा गया है।

दतिया की जनता पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है। उसे दलों की अंदरूनी लड़ाई से कोई मतलब नहीं, बल्कि विकास और समाधान चाहिए। लोग पूछ रहे हैं कि पिछले कार्यकाल में किए गए वादों का क्या हुआ। सड़कों, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के रोजगार की स्थिति क्या है। जब सत्ता पक्ष के नेता ही एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हों तो जनता का विश्वास कैसे जीता जाएगा।

भाजपा के लिए यह उपचुनाव प्रतिष्ठा की परीक्षा बन गया है। यदि इस बार हार होती है तो उसका असर केवल दतिया तक सीमित नहीं रहेगा। विपक्ष को पूरे प्रदेश में सरकार को घेरने का मुद्दा मिल जाएगा। शीर्ष नेतृत्व लगातार बैठकें कर रहा है और नाराज नेताओं को मनाने में जुटा है, लेकिन देर से किया गया प्रयास कितना असरदार होगा, यह परिणाम बताएगा।

चुनाव जीतने के लिए केवल पैसा और पोस्टर पर्याप्त नहीं होते। समर्पित कार्यकर्ता सबसे बड़ी ताकत होते हैं। यह उपचुनाव भाजपा संगठन के लिए भी सबक है कि कार्यकर्ताओं की भावनाओं की अनदेखी महंगी पड़ सकती है। अब मतदान में कुछ ही दिन शेष हैं। भाजपा को एकजुटता का संदेश देना होगा, जबकि कांग्रेस को अपनी एकता बनाए रखनी होगी। दतिया का उपचुनाव फिर याद दिलाता है कि लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत जनता होती है और अंतिम फैसला उसी के हाथ में होता है।

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आज का राशिफल

अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। नये-नये व्यापारिक अनुबंध होंगे। किसी से वाद-विवाद अथवा कहासुनी होने का भय रहेगा। मानसिक एवं शारीरिक शिथिलता पैदा होगी। जल्दबाजी में कोई भूल संभव है। आय-व्यय की स्थिति समान्य रहेगी। शुभांक-5-7-8

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