नई दिल्ली, 27 जुलाई।
संसद के मॉनसून सत्र के दौरान सोमवार को उस वक्त राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया जब भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच लोकसभा में बहुप्रतीक्षित पेपर लीक विरोधी संशोधन बिल आधिकारिक रूप से पेश किया गया। विपक्षी दलों के सांसदों ने छात्र आंदोलन के मुद्दे पर जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, जिसके चलते सदन की कारवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा इस सख्त कानून को सदन के पटल पर रखे जाने के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी जुबानी जंग भी देखने को मिली। संसदीय कार्य मंत्री ने जहां इसे छात्रों के हित में ऐतिहासिक कदम बताया, वहीं विपक्षी नेताओं ने कड़ा ऐतराज जताते हुए गृह मंत्री से जवाब की मांग की, जिससे संसद भवन परिसर का माहौल पूरी तरह गरमाया रहा।
इस नए संशोधन प्रस्ताव के तहत वर्ष 2024 के मूल नियमों में व्यापक बदलाव किए गए हैं, जिसमें दोषियों के लिए न्यूनतम सजा पांच से दस साल और जुर्माने की राशि को बढ़ाकर दस करोड़ रुपए तक कर दिया गया है। इसके अलावा मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का प्रावधान भी जोड़ा गया है ताकि अपराधियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके।















