पौड़ी, 31 जुलाई।
पर्वतीय अंचलों में पलायन की समस्या और बेरोजगारी के दौर के बीच बागवानी अब किसानों के लिए जीवन का नया संबल बन रही है, जहाँ सरकारी नीतियों के बलबूते ग्रामीण युवा स्वरोजगार की एक नई इबारत लिख रहे हैं। पौड़ी गढ़वाल के थलीसैंण विकासखंड के रहने वाले दीनदयाल बिष्ट, जो पेशे से रसायन विज्ञान के प्रवक्ता हैं, ने लॉकडाउन के कठिन दिनों में अपनी बंजर जमीन पर सेब और कीवी की खेती शुरू कर एक बेहतरीन मिसाल कायम की है।
अपने इस फल उत्पादन के सफर में उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं का भरपूर लाभ उठाया, जिसके तहत मनरेगा से बाड़बंदी और कृषि महकमे की मदद से सिंचाई के साधन जुटाए गए, साथ ही उद्यान विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से आज वह हर साल लाखों रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। जिला प्रशासन के अधिकारियों का भी यही मानना है कि यदि पहाड़ी इलाकों के स्थानीय किसान वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं, तो बंजर पड़ी भूमि को भी वरदान बनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है।














