रुड़की, 31 जुलाई।
आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी अभूतपूर्व तकनीक इजाद की है जिसके जरिए खनन अपशिष्ट और अम्लीय जल से रेडियोधर्मी यूरेनियम समेत दुर्लभ खनिजों को सुरक्षित तरीके से अलग किया जा सकेगा। शोधकर्ताओं द्वारा तैयार किया गया यह विशेष अम्ल-प्रतिरोधी नैनोकम्पोजिट पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के साथ-साथ अत्यंत महत्वपूर्ण धातुओं की पुनर्प्राप्ति का एक नया और बेहतरीन मार्ग प्रशस्त करता है।
इलेक्ट्रिक वाहनों और अत्याधुनिक उपकरणों के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले इन दुर्लभ तत्वों को पानी से अलग करने के लिए वैज्ञानिकों ने नैनोकणों पर सिलिका का एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार किया है, जो इसे तीव्र अम्लीय माहौल में भी नष्ट होने से बचाता है। प्रयोगशाला में किए गए इन परीक्षणों के दौरान यह सामग्री भारी मात्रा में खनिज निकालने में पूरी तरह कामयाब साबित हुई है, और इसे तैयार करने में पर्यावरण-अनुकूल अभिकर्मकों का इस्तेमाल किया गया है।
इस पूरी परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों का यह कहना है कि सामान्य और अत्यधिक अम्लीय दोनों ही परिस्थितियों में यह तकनीक समान रूप से प्रभावी साबित होती है और कई चक्रों तक इसकी कार्यक्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता है। केंद्र सरकार के विभाग द्वारा आर्थिक मदद प्राप्त इस शोध को भविष्य में वास्तविक अपशिष्ट जल शोधन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।














