नई दिल्ली, 31 जुलाई।
संसद परिसर में निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के भगवा वस्त्र पहनकर प्रदर्शन करने के मामले पर अखिल भारतीय संत समिति ने आपत्ति जताई है। समिति ने इस कदम को सनातन धर्म और साधु-संतों की परंपराओं का अपमान बताया है।
समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से पप्पू यादव की संसद सदस्यता रद्द करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि संसद जैसे महत्वपूर्ण स्थान का इस्तेमाल सनातन धर्म और बहुसंख्यक समाज की भावनाओं को आहत करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने पप्पू यादव से देश के हिंदू समाज से बिना शर्त माफी मांगने की मांग भी की।
समिति ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले को कांग्रेस और उसके वरिष्ठ नेताओं का समर्थन प्राप्त है। समिति के अनुसार संसद परिसर में भगवा वस्त्र पहनकर इस तरह का प्रदर्शन स्वीकार नहीं किया जा सकता।
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन इसके नाम पर सनातन हिंदू धर्म और साधु-संतों की तपस्या को निशाना बनाने का प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि संसद संविधान के तहत एक पवित्र परिसर है और इसका उपयोग किसी भी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सनातन परंपराओं के खिलाफ किसी भी प्रयास का साधु-संत विरोध करेंगे।
समिति ने कहा कि देश की आस्था और सम्मान से जुड़े विषयों पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में साधु-संत एकजुट होकर अपनी प्रतिक्रिया देंगे।
गौरतलब है कि मानसून सत्र के 12वें दिन विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर संसद परिसर में प्रदर्शन किया था। इसी दौरान पप्पू यादव भगवा वस्त्र पहनकर पुजारी के रूप में बैठे थे।
















