नई दिल्ली, 1 अक्टूबर।
क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया की 63वीं वार्षिक आम बैठक में कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी की सेहत, रसायनों के संतुलित इस्तेमाल, जलवायु परिवर्तन, टिकाऊ खेती तथा कृषि रसायन उत्पादों की गुणवत्ता और निर्यात क्षमता बढ़ाने पर चर्चा हुई। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों के अनियंत्रित उपयोग पर चिंता जताई। पूर्व केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बदलते मौसम और जलवायु संकट से निपटने के लिए नई तकनीक और सकारात्मक नियामक विकल्प अपनाने की जरूरत बताई।
बुधवार को आयोजित बैठक का मुख्य विषय कृषि विकास, स्थिरता और निर्यात सुनिश्चित करना रहा। इसमें कृषि एवं कृषि रसायन क्षेत्र के विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, उद्योग प्रतिनिधियों और युवा मुख्य कार्यकारी अधिकारियों ने रसायनों के इस्तेमाल, जलवायु परिवर्तन, अनुसंधान, नियामक व्यवस्था, गुणवत्ता, विनिर्माण और निर्यात से जुड़े मुद्दों पर विचार रखे।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि अधिक उत्पादन की कोशिश में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इसका असर मिट्टी और मानव स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि केवल बैठकों तक सीमित रहने के बजाय जमीन पर ठोस काम करने की जरूरत है। स्वस्थ मिट्टी को स्वस्थ देश के लिए जरूरी बताते हुए उन्होंने इस दिशा में प्राथमिकता तय करने पर जोर दिया।
ठाकुर ने बताया कि सरकार जमीन की डिजिटल पहचान तैयार कर रही है, ताकि मिट्टी की जरूरत के अनुसार खाद और कृषि रसायनों का इस्तेमाल किया जा सके। उन्होंने उद्योग, वैज्ञानिकों और निवेशकों से कीटनाशकों की बढ़ती जरूरत के कारणों पर विचार करने को कहा। उनका कहना था कि कृषि व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी और मानव स्वास्थ्य की भी रक्षा हो।
उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि 33 जिलों में 56 लाख किसान करीब 15 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उन्होंने रासायनिक और प्राकृतिक तरीके से उगाई गई सब्जियों के बीच अंतर का भी उल्लेख किया। ठाकुर ने कहा कि किसानों के हित में उद्योग जगत द्वारा लिए जाने वाले व्यावहारिक निर्णयों पर सरकार अपनी क्षमता और आर्थिक स्थिति के अनुसार संवेदनशीलता से विचार करेगी।
कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जलवायु परिवर्तन को कृषि और कृषि रसायन उद्योग के सामने बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष अल नीनो के कारण कुल वर्षा में करीब 20 प्रतिशत कमी आई है और पारंपरिक कृषि-जलवायु क्षेत्र तेजी से बदल रहे हैं।
जावड़ेकर ने बताया कि दक्षिण भारत, बिहार और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में मौसम असंतुलित है। वहीं राजस्थान के रेगिस्तान और कच्छ में असामान्य बारिश हुई है। कम समय में अत्यधिक वर्षा, बादल फटने और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी घटनाओं से उपजाऊ मिट्टी बह रही है। उन्होंने इसे कृषि और कृषि रसायन उद्योग दोनों के लिए चुनौती बताया।
उन्होंने कहा कि भारत के पास दुनिया की केवल 2.4 प्रतिशत भूमि और चार प्रतिशत ताजे जल संसाधन हैं। इसके बावजूद देश को दुनिया की 18 प्रतिशत मानव आबादी और 18 प्रतिशत पशुधन का भरण-पोषण करना है। ऐतिहासिक रूप से वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में भारत की हिस्सेदारी करीब तीन प्रतिशत रही है, जो वर्तमान में सात प्रतिशत है।
जावड़ेकर ने कहा कि सरकार ने कारोबार सुगम बनाने के लिए करीब 25 से 30 हजार अनावश्यक अनुपालनों को समाप्त किया है और प्रक्रियाओं को और सरल बनाने का काम जारी है। उन्होंने नीम लेपित यूरिया, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, किसान सम्मान निधि और फसल बीमा योजना जैसी पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि किसान सम्मान निधि के तहत 10 करोड़ किसानों को 46,000 रुपये मिले हैं। वहीं 34 हजार करोड़ रुपये के प्रीमियम के बदले फसल बीमा योजना के तहत 1.83 लाख करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया है।
कृषि आयुक्त डॉ. पीके सिंह ने कहा कि टिकाऊ कृषि केवल रसायनों के इस्तेमाल को कम करने से हासिल नहीं होगी, बल्कि रोग प्रतिरोधी और जलवायु अनुकूल फसल किस्मों के विकास की भी जरूरत है। वैज्ञानिकों द्वारा उन्नत किस्में विकसित किए जाने से खेतों में रसायनों का इस्तेमाल अपने आप कम हो सकता है।
उन्होंने बताया कि वैश्विक युद्ध और आपूर्ति बाधाओं के कारण इस वर्ष उर्वरक सब्सिडी का खर्च 2.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की संभावना है। कीट-पतंगों में रसायनों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही है। ऐसे में उद्योग को 20-25 वर्ष पुरानी तकनीकों पर निर्भर रहने के बजाय अनुसंधान और विकास को प्राथमिकता देने की जरूरत है।
डॉ. सिंह ने नैनो कीटनाशकों, जैव उत्तेजक और सुरक्षित खरपतवारनाशकों के विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता निर्यात की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है। नए कीटनाशक प्रबंधन विधेयक में गुणवत्ता और उत्पाद की पूरी जानकारी दर्ज करने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे उत्पाद के निर्माण स्थल और किसान तक उसकी पहुंच का पता लगाया जा सके।
बैठक के तकनीकी सत्रों में कृषि रसायन क्षेत्र में विदेशी कंपनियों के साथ रणनीतिक साझेदारी, अनुसंधान में जापानी कंपनियों की बढ़ती भूमिका, पिछड़े एकीकरण के जरिए भारत को विनिर्माण केंद्र बनाने और नियामक व्यवस्था से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। एमआरएल और आईपीएमएस से जुड़े मुद्दों पर भी विशेषज्ञों और युवा मुख्य कार्यकारी अधिकारियों ने अपने विचार रखे।
तकनीकी चर्चाओं में कृषि विकास, टिकाऊपन और निर्यात को साथ आगे बढ़ाने की रणनीति पर जोर दिया गया। बदलते जलवायु पैटर्न, फसल उत्पादन की चुनौतियों, कीटों में रसायनों के प्रति बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता, उत्पाद गुणवत्ता और नियामक मानकों के अनुरूप विनिर्माण जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
सीसीएफआई के उपाध्यक्ष ओमवीर त्यागी ने धन्यवाद ज्ञापन में केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर के प्रति आभार जताया। क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया देश की 50 प्रमुख कृषि रसायन कंपनियों का शीर्ष संगठन है। बैठक में कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी और पर्यावरण की सेहत बनाए रखने, नई तकनीक और अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा भारत की विनिर्माण और निर्यात क्षमता मजबूत करने से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।














