नई दिल्ली, 07 अक्टूबर।
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने महंगाई पर काबू पाने के लिए रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट यानी 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इस फैसले से कर्ज की लागत बढ़ने की संभावना है और निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद भी कम हो गई है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि आगे का फैसला आर्थिक परिस्थितियों और महंगाई के रुख को देखते हुए लिया जाएगा, जिसमें दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रखना या जरूरत पड़ने पर और बढ़ाना शामिल हो सकता है। बढ़ी हुई दरों का सबसे सीधा असर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन ग्राहकों पर पड़ेगा, क्योंकि ऐसे कर्ज बाहरी बेंचमार्क से जुड़े होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी का बोझ ईएमआई बढ़ाकर या लोन की अवधि लंबी करके ग्राहकों पर डाल सकते हैं। 25 साल के लिए 50 लाख रुपये के होम लोन पर ईएमआई करीब 816 रुपये बढ़ने और पूरी अवधि में लगभग 2.45 लाख रुपये अतिरिक्त ब्याज का बोझ पड़ने का अनुमान है। इसी तरह 30 लाख रुपये के कर्ज पर ईएमआई करीब 490 रुपये और 40 लाख रुपये पर लगभग 654 रुपये बढ़ सकती है। ईएमआई स्थिर रखने पर 25 साल का कर्ज करीब 22 महीने और बढ़कर लगभग 27 साल में पूरा हो सकता है।
ब्याज दर बढ़ने का असर ग्राहक की लोन व्यवस्था पर निर्भर करेगा। फ्लोटिंग रेट वाले कर्जदारों पर रीसेट साइकिल पूरी होने के बाद प्रभाव दिख सकता है, जबकि पहले से फिक्स्ड रेट पर लिए गए होम लोन की मौजूदा ईएमआई पर तत्काल असर नहीं होगा। हालांकि, नया कर्ज लेने या रीफाइनेंस कराने वालों को ऊंची दरों का सामना करना पड़ सकता है। रेपो रेट बढ़ने से बैंकों की फंडिंग लागत बढ़ने के कारण होम लोन के अलावा कार और पर्सनल लोन भी महंगे हो सकते हैं। दूसरी ओर, बैंक जमा बढ़ाने के लिए एफडी और बचत खातों पर ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं, जिससे बचतकर्ताओं और वरिष्ठ नागरिकों को लाभ मिल सकता है। ऊंची ब्याज दरों से क्रेडिट ग्रोथ धीमी पड़ने की आशंका है, जबकि एफडी में अधिक जमा आने से बैंकों को अपने नेट इंटरेस्ट मार्जिन को संतुलित करना होगा। यह कदम 5.2 प्रतिशत की अनुमानित महंगाई को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। ब्याज दर बढ़ने से मांग और बाजार में नकदी पर अंकुश लग सकता है, हालांकि कंपनियों की विस्तार योजनाओं की लागत बढ़ने से आर्थिक गतिविधियों पर दबाव भी पड़ सकता है। इसके बावजूद वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7.1 प्रतिशत रखा गया है।














