चेन्नई, 7 अक्टूबर।
महानगरों में तेज बारिश के बाद होने वाले शहरी जलभराव और बाढ़ के अधिक सटीक पूर्वानुमान की दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के नेतृत्व में किए गए अध्ययन से महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं। शोध में वायुमंडलीय प्रक्रियाओं, वर्षा, जल विज्ञान और जलाशयों पर पड़ने वाले दबाव को एक साथ समझने का प्रयास किया गया है।
अध्ययन में 2015 की चेन्नई बाढ़ को आधार बनाकर विभिन्न परिस्थितियों में बारिश का अनुकरण किया गया। इसके लिए वायुमंडलीय मॉडल, जल विज्ञान संबंधी गणना, बाढ़ मॉडल और उपग्रह आधारित आंकड़ों का उपयोग किया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, वातावरण में मौजूद सूक्ष्म कणों को मॉडल में शामिल करने से अड्यार जलग्रहण क्षेत्र में अनुमानित वर्षा में करीब 22 प्रतिशत सुधार हुआ।
इसका असर बाढ़ के अनुमान पर भी दिखाई दिया। अध्ययन में बाढ़ के संभावित फैलाव के अनुमान की सटीकता में करीब 50 प्रतिशत सुधार दर्ज किया गया। शोधकर्ताओं का कहना है कि अत्यधिक बारिश की मात्रा और स्थान का सूक्ष्म पूर्वानुमान जलाशय प्रबंधन तथा बाढ़ जोखिम आकलन में उपयोगी हो सकता है।
हालांकि यह व्यवस्था अभी तत्काल इस्तेमाल होने वाली बाढ़ चेतावनी प्रणाली नहीं है। इसके लिए अलग-अलग अत्यधिक वर्षा की घटनाओं पर परीक्षण और लगातार सुधार जरूरी होगा। भविष्य में इसे अन्य वर्षा-प्रवण महानगरों में भी आजमाया जा सकता है।













