नई दिल्ली, 12 अक्टूबर।
ऑस्ट्रेलिया की पुरुष क्रिकेट टीम मार्च 2027 में इंग्लैंड के खिलाफ होने वाले ऐतिहासिक 150वीं वर्षगांठ टेस्ट मैच में खास हरे और सुनहरे रंग की जर्सी पहनकर मैदान पर उतरेगी। इस विशेष किट को तैयार करने के लिए ऑस्ट्रेलिया ने खेल सामग्री निर्माता एसिक्स के साथ साझेदारी की है। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में 11 मार्च से शुरू होने वाला यह मुकाबला दिन-रात का होगा और गुलाबी गेंद से खेला जाएगा। मैच से 150 दिन पहले जारी की गई जर्सी में ऑस्ट्रेलिया की पारंपरिक टेस्ट पोशाक को नया रूप दिया गया है। पहले जर्सी पर सुनहरे बबूल के फूलों से प्रेरित डिजाइन होता था, लेकिन इस बार सुनहरी पट्टियों को प्रमुखता दी गई है। शर्ट पर हरे रंग की पट्टी, कॉलर और पैंट के किनारों पर सुनहरी धारियां तथा सुनहरे बटन भी इसकी खासियत होंगे। आस्तीन पर वर्षगांठ टेस्ट का विशेष चिह्न और एसिक्स का लोगो रहेगा। कंधों पर आदिवासी कलाकार आंटी फियोना क्लार्क की ‘लैंड एंड सी’ कलाकृति भी बरकरार रखी जाएगी। इसमें ‘वॉकअबाउट विकेट्स’ की आकृति शामिल है, जो 1868 में इंग्लैंड का दौरा करने वाली ऑस्ट्रेलिया की आदिवासी क्रिकेट टीम को सम्मान देती है। इस किट का उद्देश्य टेस्ट क्रिकेट की विरासत और ऑस्ट्रेलिया की पारंपरिक पहचान को एक साथ प्रदर्शित करना है।
वर्षगांठ टेस्ट को लेकर दर्शकों में भी जबरदस्त उत्साह है और मुकाबले के शुरुआती तीन दिनों के सभी सार्वजनिक टिकट बिक चुके हैं। इस मैच के साथ ऑस्ट्रेलिया में मार्च के महीने में घरेलू टेस्ट क्रिकेट की वापसी होगी। इससे पहले देश में मार्च 1979 में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मुकाबले आयोजित किए गए थे। ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए यह ऐतिहासिक मैच एक बेहद व्यस्त कार्यक्रम के बीच आएगा। टीम को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला के बाद न्यूजीलैंड से चार टेस्ट खेलने हैं। इसके बाद भारत दौरे पर पांच मैचों की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी श्रृंखला होगी, जिसके बाद टीम मेलबर्न लौटकर वर्षगांठ टेस्ट खेलेगी। आगे इंग्लैंड में संभावित विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल और पांच टेस्ट मैचों की एशेज श्रृंखला भी उसका इंतजार कर रही है। अगस्त से शुरू हुए 12 महीने के इस चक्र में ऑस्ट्रेलिया को कुल 21 टेस्ट मैच तक खेलने पड़ सकते हैं। ऐसे में इंग्लैंड के खिलाफ यह मुकाबला न केवल क्रिकेट इतिहास के 150 साल पूरे होने का उत्सव होगा, बल्कि टीम के व्यस्त अंतरराष्ट्रीय सत्र का भी प्रमुख आकर्षण बनेगा।











