कज़ान, 14 अक्टूबर।
रूस के कज़ान स्थित केंद्रीय लाइब्रेरी में भारतीय साहित्य को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। बुधवार को यहां ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेताओं की छह पुस्तकों के रूसी अनुवाद शामिल किए गए। यह कार्यक्रम दो दिवसीय टाइम बिजनेस फोरम से पहले आयोजित हुआ।
इन पुस्तकों के लेखकों में अमृता प्रीतम, गुलजार, फिराक गोरखपुरी और महाश्वेता देवी शामिल हैं। कार्यक्रम में भारत के महावाणिज्यदूत जय सुंदर, वाणी प्रकाशन के अध्यक्ष अरुण माहेश्वरी, तातारस्तान की संस्कृति मंत्री इरादा अयुपोवा और पुस्तकों के अनुवादक मौजूद रहे।
जय सुंदर ने कहा कि साहित्य और भाषा के माध्यम से विभिन्न देशों की संस्कृति को समझने का अवसर मिलता है। पुस्तकों के रूसी अनुवाद से वहां के पाठक भारतीय जीवन, साहित्य और संस्कृति से परिचित हो सकेंगे।
उन्होंने बताया कि यह पहल भारत और रूस के बीच रणनीतिक एवं आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के प्रयासों से भी जुड़ी है। गुरुवार से शुरू होने वाला टाइम बिजनेस फोरम व्यापार और निवेश के साथ तकनीक, औषधि, शिक्षा, परिवहन, रक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में सहयोग बढ़ाने का अवसर देगा।
वाणी प्रकाशन के अध्यक्ष अरुण माहेश्वरी ने बताया कि वर्ष 1960 से भारतीय पाठकों के बीच रूसी साहित्य की लोकप्रियता रही है। अब भारतीय साहित्य को रूसी पाठकों तक पहुंचाने के उद्देश्य से हिंदी, पंजाबी, मराठी और बांग्ला भाषाओं की रचनाओं का रूसी में अनुवाद किया गया है।
वाणी प्रकाशन की संपादक अदिति माहेश्वरी ने कहा कि भारत का पुस्तक प्रकाशन उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहा है। नीलसन बुकस्कैन की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय पुस्तक प्रकाशन बाजार वर्ष 2030-31 तक 21.4 अरब अमेरिकी डॉलर यानी लगभग दो लाख करोड़ रुपये का हो सकता है। इसके साथ भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा प्रकाशन बाजार बन सकता है।













