नई दिल्ली, 19 अक्टूबर।
भारत की युवा कार्टिंग रेसर आरशी गुप्ता का कहना है कि मुकाबले में आखिरी क्षण तक डटे रहना ही असली जीत है। देश की सबसे कम उम्र की नेशनल कार्टिंग चैंपियनशिप विजेता आरशी ने सोमवार को दिल्ली के प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उनकी कभी हार न मानने की जिद उन्हें दूसरों से अलग बनाती है।
फरीदाबाद की आरशी ने अपने 10वें जन्मदिन पर रविवार को एफएमएससीआई आरएमसी इंडियन नेशनल कार्टिंग चैंपियनशिप-2026 की मिनी मैक्स श्रेणी का खिताब जीता। इसके साथ ही वह रोटैक्स मैक्स चैलेंज की मिनी श्रेणी जीतने वाली दुनिया की सबसे कम उम्र की रेसर बन गईं। इससे पहले उन्होंने 2025 में माइक्रो मैक्स श्रेणी में खिताब हासिल किया था। इस तरह उन्होंने लगातार दो वर्षों में दो अलग-अलग श्रेणियों में जीत दर्ज की।
आरशी ने कहा कि वह कठिन रेसिंग ट्रैक पर मुकाबला करना, बेहतरीन ड्राइवरों को हराना और हर साल चैंपियनशिप जीतना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि इस सफर में मेहनत और धैर्य की जरूरत है। वह ट्रैक पर लड़कों के साथ अधिक से अधिक लड़कियों को प्रतिस्पर्धा करते हुए देखना चाहती हैं।
उनकी मां डॉ. दीप्ति गुप्ता ने कहा कि अभिभावकों को छह से आठ वर्ष की उम्र में ही बच्चों की खेल संबंधी रुचि पहचानने का प्रयास करना चाहिए। इससे बच्चों को पढ़ाई के साथ खेल में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है और उनकी रुचि के अनुसार समय रहते निर्णय लिया जा सकता है।
आरशी के कोच रोहित खन्ना ने उनकी सफलता का श्रेय समर्पण, अनुशासन और दृढ़ संकल्प को दिया। ब्रिटेन के कोच डेविड बेलचैम्बर्स ने भी उनकी प्रतिभा, मेहनत और प्रगति की सराहना की।
आरशी के माता-पिता के अनुसार, वर्ष 2025 में उन्होंने 137 दिन ट्रैक पर बिताए और 29 रेस में हिस्सा लिया। वर्ष 2026 में अब तक वह 140 दिन अभ्यास कर चुकी हैं और 30 रेस में भाग ले चुकी हैं। उनकी तैयारी में संयुक्त अरब अमीरात में पांच महीने का प्रशिक्षण और ब्रिटेन में 13 सप्ताह का अभ्यास शामिल रहा है। इस दौरान उन्होंने स्कूल की पढ़ाई के साथ प्रशिक्षण का संतुलन बनाए रखा।
आरशी भारत, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, श्रीलंका और फ्रांस के 21 रेसिंग सर्किटों पर अभ्यास और प्रतिस्पर्धा कर चुकी हैं। अब उनका लक्ष्य तेज कार्ट्स और बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में हिस्सा लेकर वैश्विक मोटरस्पोर्ट्स में भारत का प्रतिनिधित्व करना है। वह ‘एफआईए अकादमी डिस्कवर योर ड्राइव’ कार्यक्रम के लिए चुनी जाने वाली दुनिया की सबसे कम उम्र की रेसर हैं और एफआईए प्रेसिडेंट मेडल से भी सम्मानित हो चुकी हैं।











