517 गेंदों पर बनाए 400 रन
सोविमा स्थित नगालैंड क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में सुतार ने धैर्य और एकाग्रता का बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने 517 गेंदों का सामना करते हुए 46 चौके और सात छक्के लगाए। 155वें ओवर में उन्होंने अपना चौहरा शतक पूरा किया। उनकी पारी की बदौलत मिजोरम ने नौ विकेट पर 581 रन बनाकर पारी घोषित कर दी।
443 रन के रिकॉर्ड से चूके
रणजी ट्रॉफी में सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी का रिकॉर्ड महाराष्ट्र के बीबी निम्बालकर के नाम है। उन्होंने 1948-49 के सत्र में काठियावाड़ के खिलाफ नाबाद 443 रन बनाए थे। सुतार के पास इस रिकॉर्ड को तोड़ने का मौका था, लेकिन 400 रन बनाने के बाद उनकी पारी आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बावजूद उन्होंने पृथ्वी शॉ के 379 रन के स्कोर को पीछे छोड़ दिया।
दसवें विकेट के लिए 190 रन की साझेदारी
सुतार ने लालरेमपुनिया छकछुआक के साथ दसवें विकेट के लिए नाबाद 190 रन जोड़े। रणजी ट्रॉफी में आखिरी विकेट के लिए यह तीसरी सबसे बड़ी साझेदारी है। इस श्रेणी में सर्वोच्च रिकॉर्ड अजय शर्मा और मनिंदर सिंह के नाम है। दोनों ने 1991-92 के सत्र में मुंबई के खिलाफ 233 रन जोड़े थे।
मुंबई छोड़कर मिजोरम से जुड़े थे सुतार
सुतार इससे पहले मुंबई की ओर से घरेलू क्रिकेट खेल चुके हैं। उन्होंने मुंबई टी20 लीग में एमएससी मराठा रॉयल्स को खिताब बचाने में मदद की थी। छह पारियों में उनके बल्ले से 212 रन निकले थे। 2026-27 सत्र से पहले उन्होंने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेकर मिजोरम की टीम का दामन थाम लिया।
मिजोरम के लिए अपने पहले रणजी मुकाबले में उन्होंने मणिपुर के खिलाफ 35 और 99 रन बनाए थे। अब दूसरे ही प्रथम श्रेणी मैच में 400 रन बनाकर उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपनी प्रतिभा का शानदार परिचय दिया है।











