आइची-नागोया, 23 अक्टूबर।
एशियाई पैरा खेल-2026 की पुरुष एकल एसएल3 बैडमिंटन स्पर्धा में भारत के नितेश कुमार ने स्वर्णिम सफलता हासिल की है। शुक्रवार को खेले गए रोमांचक फाइनल मुकाबले में उन्होंने अपने ही देश के दिग्गज खिलाड़ी और मौजूदा विश्व चैंपियन प्रमोद भगत को सीधे गेम में 21-18, 21-16 से पराजित किया।
इस जीत के साथ नितेश ने स्वर्ण पदक पर कब्जा किया, तो वहीं प्रमोद भगत को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। दोनों ही दिग्गज पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं, जिससे यह खिताबी मुकाबला भारतीय पैरा बैडमिंटन के इतिहास में बेहद खास बन गया।
दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी और मौजूदा पैरालंपिक चैंपियन नितेश ने मैच की शुरुआत से ही काफी संयमित और सटीक खेल दिखाया। पहले गेम में दोनों भारतीय सूरमाओं के बीच बराबरी की टक्कर देखने को मिली, जिसमें नितेश ने 21-18 से बाजी मारी।
दूसरे गेम में भी प्रमोद ने वापसी की पुरजोर कोशिश की, परंतु नितेश ने दबाव के पलों में अहम अंक भुनाते हुए 21-16 से गेम और मैच अपने नाम कर लिया।
इस शानदार जीत के साथ नितेश ने एशियाई पैरा खेलों में पुरुष एकल एसएल3 श्रेणी का स्वर्ण अपने नाम कर लिया। दूसरी ओर 38 वर्षीय प्रमोद को रजत पदक मिला। इससे पूर्व प्रमोद 2018 और 2022 के एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक हासिल कर चुके हैं।
हरियाणा के चरखी दादरी निवासी नितेश कुमार का जन्म 30 दिसंबर 1994 को हुआ था। उन्होंने आईआईटी मंडी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। बचपन में फुटबॉल के शौकीन रहे नितेश साल 2009 में विशाखापत्तनम में हुए एक हादसे का शिकार हो गए थे, जिससे उनके पैर में गंभीर चोट आई।
कई महीनों तक बिस्तर पर रहने के बाद भी उनका हौसला नहीं टूटा। आईआईटी मंडी में पढ़ाई के दौरान बैडमिंटन के प्रति उनका रुझान बढ़ा और उन्होंने पैरा बैडमिंटन को अपना करियर बना लिया।
नितेश ने वर्ष 2016 में फरीदाबाद पैरा नेशनल प्रतियोगिता से राष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण कर कांस्य पदक जीता था। इसके बाद 2017 में एकल में रजत और युगल में कांस्य पदक प्राप्त किया।
2020 की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्होंने प्रमोद भगत और मनोज को मात देकर स्वर्ण जीता। पेरिस पैरालंपिक-2024 में पुरुष एकल का स्वर्ण पदक हासिल करना उनके करियर का सबसे बड़ा मुकाम रहा। वे 2022 एशियाई पैरा खेलों में पुरुष युगल का स्वर्ण, एकल का रजत और मिश्रित युगल का कांस्य पदक भी जीत चुके हैं।
दूसरी तरफ प्रमोद भगत की जीवन यात्रा भी संघर्ष और अभूतपूर्व सफलताओं से भरी हुई है। उनका जन्म 4 जून 1988 को बिहार के वैशाली जिले में हुआ था। जब वे महज चार-पांच साल के थे, तब पोलियो के कारण उनका बायां पैर प्रभावित हो गया था।
बाद में वे ओडिशा के बरगढ़ जिले के अटाबीरा में अपने रिश्तेदारों के पास रहने लगे। बचपन में अपने आसपास के बच्चों को खेलते देख उनके मन में भी बैडमिंटन के प्रति रुचि पैदा हुई।
प्रमोद ने साल 2006 में पैरा बैडमिंटन को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम बढ़ाए। टोक्यो पैरालंपिक-2020 में उन्होंने ब्रिटेन के डेनियल बेथेल को 21-14, 21-17 से हराकर स्वर्ण पदक जीता था।
वे पैरालंपिक बैडमिंटन में भारत को पहला स्वर्ण दिलाने वाले एथलीट बने। इसके साथ ही वे छह बार विश्व चैंपियन रहने की अद्वितीय उपलब्धि भी हासिल कर चुके हैं।
नितेश और प्रमोद के बीच हुए इस फाइनल मुकाबले ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारतीय पैरा बैडमिंटन के दबदबे को साबित किया है। दोनों ही खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन से देश का मान बढ़ाया, हालांकि इस बार बाजी नितेश के हाथ लगी।











