रेडवुड सिटी, 23 अक्टूबर।
भारत की होनहार युवा स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने सिलिकॉन वैली ओपन में जोरदार वापसी करते हुए एक और बड़ा उलटफेर कर दिया है। क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उन्होंने मिस्र की छठी वरीयता प्राप्त सलमा हानी को पराजित कर पहली बार पीएसए गोल्ड स्तर की प्रतियोगिता के सेमीफाइनल में अपना स्थान पक्का किया।
विश्व रैंकिंग में 15वें पायदान पर मौजूद 18 वर्षीय अनाहत ने 42 मिनट तक चले मैराथन मुकाबले में दुनिया की 14वें नंबर की खिलाड़ी हानी को 4-11, 11-8, 4-11, 11-2, 11-5 से मात दी।
मुकाबले के दौरान अनाहत 1-2 के अंतर से पिछड़ रही थीं, लेकिन उन्होंने बेहतरीन मानसिक दृढ़ता दिखाते हुए लगातार दो गेम जीतकर ऐतिहासिक जीत अपने नाम की।
इससे पूर्व उन्होंने मिस्र की ही विश्व नंबर तीन और आठ बार की विश्व चैंपियन नूर एलशेरबिनी को सीधे सेटों में धूल चटाकर खेल जगत को हैरान कर दिया था।
अनाहत ने अपनी जीत के बाद साझा किया कि उन्होंने हानी के खिलाफ पहले कोई मैच नहीं खेला था और उन्हें कोर्ट पर उतरने से पूर्व मैच के रुख का अंदाजा नहीं था।
भारतीय खिलाड़ी ने बताया कि हानी पीएसए टूर की मंझी हुई खिलाड़ी हैं और वे उनकी तकनीक को देखती रही हैं। एलशेरबिनी पर मिली जीत ने उनका भरोसा काफी बढ़ाया और उन्हें महसूस हुआ कि बेहतरीन प्रदर्शन से किसी भी मजबूत खिलाड़ी को मात दी जा सकती है।
अनाहत ने यह भी माना कि बीते दिन की बड़ी जीत के बाद वे मानसिक रूप से कुछ थकान महसूस कर रही थीं, लेकिन वे अपने अभियान की लय को टूटने नहीं देना चाहती थीं। उन्होंने अपना सौ प्रतिशत योगदान दिया और अंतिम चार में पहुंचकर अपनी खुशी जताई।
सेमीफाइनल के दौर में अनाहत का मुकाबला मलेशिया की विश्व नंबर चार और एशियाई खेलों की मौजूदा स्वर्ण पदक विजेता शिवसांगरी सुब्रमण्यम से होगा। शिवसांगरी ने एशियाई खेलों के महिला एकल के फाइनल में अनाहत को हराया था। उल्लेखनीय है कि स्क्वैश को लॉस एंजिलिस ओलंपिक खेलों में पहली बार जगह मिलने जा रही है।
अनाहत ने 2023 के हांगझोऊ एशियाई खेलों में महिला टीम और मिश्रित युगल में दो कांस्य पदक हासिल किए थे। इसके पश्चात आइची-नागोया एशियाई खेल-2026 में महिला एकल श्रेणी का रजत पदक जीतकर वे एशियाई खेलों के स्क्वैश एकल फाइनल तक पहुंचने वाली प्रथम भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं। इसी वर्ष उन्होंने विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप में लड़कियों का एकल खिताब जीतकर इस ऐतिहासिक मुकाम को पाने वाली पहली भारतीय बनने का गौरव हासिल किया और इस स्पर्धा पर मिस्र के 15 वर्षों से चले आ रहे वर्चस्व को खत्म किया।











