भोपाल, 23 अक्टूबर।
मध्य प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने और उनकी पढ़ाई जारी रखने के लिए राज्य सरकार एकलव्य शिक्षा छात्रवृत्ति योजना के तहत आर्थिक सहायता दे रही है। वर्ष 2025-26 में इस योजना के अंतर्गत 2,216 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई। इनमें 1,180 छात्र और 1,036 छात्राएं शामिल हैं। इस दौरान कुल 2.77 करोड़ रुपये वितरित किए गए।
अगले वर्ष छात्रवृत्ति का लक्ष्य 5 करोड़ रुपये
वर्ष 2026-27 के लिए छात्रवृत्ति का लक्ष्य बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 80 प्रतिशत अधिक है। योजना का उद्देश्य वन आधारित आजीविका से जुड़े परिवारों के बच्चों को शिक्षा के लिए आर्थिक संबल देना है।
कक्षा के अनुसार मिलती है छात्रवृत्ति
योजना के तहत कक्षा 9वीं से 12वीं और महाविद्यालयों में पढ़ने वाले पात्र विद्यार्थियों को निर्धारित नियमों के अनुसार सहायता दी जाती है। पात्रता के लिए पिछले पांच वर्षों में कम से कम तीन वर्ष तक हर साल एक मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण करने और निर्धारित अंकों से जुड़े मानदंडों को पूरा करना जरूरी है।
छात्रवृत्ति की राशि कक्षा और पाठ्यक्रम के अनुसार तय की गई है। कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों को अधिकतम 15 हजार रुपये, कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों को 18 हजार रुपये, गैर-तकनीकी स्नातक पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को 25 हजार रुपये और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में पढ़ने वालों को अधिकतम 60 हजार रुपये दिए जाते हैं।
शहडोल सहित वनमंडलों को भी मिला आवंटन
वर्ष 2024-25 में शहडोल जिले के 130 विद्यार्थियों के लिए 18.35 लाख रुपये आवंटित किए गए थे। इसके अलावा छह वनमंडलों के 362 विद्यार्थियों के लिए 25.27 लाख रुपये दिए गए। योजना के माध्यम से तेंदूपत्ता संग्रहण पर निर्भर परिवारों के बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहित किया जा रहा है।














