भोपाल, 23 अक्टूबर।
केरवा डैम की सीमा और आसपास के अतिक्रमणों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा गठित टीम ने गुरुवार को मौके का निरीक्षण किया। टीम शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसे अधिकरण में प्रस्तुत किया जाएगा। इस मामले में अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को निर्धारित है।एफटीएल और बफर क्षेत्र का होगा निर्धारण
एनजीटी ने जलाशय के पूर्ण जलस्तर (एफटीएल) और उसके बफर क्षेत्र की सीमा तय करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सरकारी अभिलेखों, जल संसाधन विभाग के कंटूर और स्थलाकृतिक मानचित्रों तथा जलाशय की ऊंचाई को आधार बनाया जाएगा। अधिकरण ने यह प्रक्रिया तीन सप्ताह में पूरी करने को कहा है।
सीमा निर्धारण के लिए ड्रोन सर्वेक्षण, उपग्रह चित्रों, जमीनी सत्यापन और उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड का उपयोग किया जाएगा। टीम की विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश होगी।
1,080 सीमा-चिह्नों की भी होगी जांच
उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड के अनुसार, केरवा डैम का जलमग्न क्षेत्र करीब 462.150 हेक्टेयर है। इसकी सीमा पहले 1,080 कंक्रीट ब्लॉकों और खंभों से चिह्नित की गई थी। निरीक्षण के दौरान टीम यह पता लगाएगी कि इनमें से कितने सीमा-चिह्न मौके पर मौजूद हैं।
पहले 33 अतिक्रमण किए गए थे चिह्नित
पिछली जांच में जलाशय क्षेत्र में 33 अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे। इनमें 18 सरकारी भूमि और 15 निजी भूमि से जुड़ी संरचनाएं बताई गई थीं। अब ड्रोन सर्वेक्षण और भौतिक सत्यापन के जरिए पता लगाया जाएगा कि इनमें से कितने अतिक्रमण अब भी मौजूद हैं और उनकी वास्तविक स्थिति क्या है।
टीम की रिपोर्ट में एफटीएल और बफर क्षेत्र के निर्धारण के साथ निरीक्षण के निष्कर्ष भी शामिल होंगे।














