भोपाल, 24 अक्टूबर।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों को धार्मिक एवं सांस्कृतिक तीर्थों के रूप में विकसित करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘अभ्युदय’ का शुभारंभ करते हुए भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, विचारों और शिक्षाओं पर शोध को प्रोत्साहित करने का आश्वासन दिया। सम्मेलन 25 अक्टूबर तक चलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन चुनौतियों के बीच कर्तव्य निभाने, मित्रता का सम्मान करने, सामाजिक न्याय स्थापित करने और जनकल्याण के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है। कंस का वध करने के बाद स्वयं सत्ता पर आसीन न होना, सुदामा के साथ मित्रता निभाना और अपने वचनों के प्रति प्रतिबद्ध रहना उनके व्यक्तित्व के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीकृष्ण के जीवन से लोकतांत्रिक मूल्यों, उद्यमशीलता, माता-पिता के सम्मान, अनुशासन और सेवा भाव की सीख मिलती है। उन्होंने शिक्षा, शोध और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, सरकार चित्रकूट, ओंकारेश्वर और भगवान श्रीराम तथा श्रीकृष्ण से जुड़े अन्य स्थलों की विरासत को संरक्षित करने के साथ धार्मिक एवं ऐतिहासिक पर्यटन को भी प्रोत्साहित कर रही है। इस अवसर पर इंडोनेशिया से आए पद्मश्री डॉ. अगुष इंद्र उद्याना ने मुख्यमंत्री को पारंपरिक घंटी भेंट की। कार्यक्रम में संस्कृति विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद्, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विद्वान शामिल हुए।

‘अभ्युदय’ सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय सभ्यतागत ज्ञान और आधुनिक पर्यावरणीय, सामाजिक तथा सुशासन संबंधी मानकों को जोड़कर समग्र विकास के रास्ते तलाशना है। इसमें मानव संसाधन प्रबंधन, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व और संस्थागत निर्णयों में कर्मयोग, लोकसंग्रह तथा धर्म जैसे भारतीय विचारों की प्रासंगिकता पर चर्चा की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेकर समाज के कल्याण और जिम्मेदार शासन के लिए काम किया जाना चाहिए। सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण, समावेशी सामाजिक विकास, नैतिक प्रशासन और संस्थानों की सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर व्यावहारिक सुझाव तैयार करने पर भी जोर दिया गया। आयोजकों के अनुसार, सरकार, उद्योग, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी, पद्मश्री डॉ. एचआर नागेंद्र, अद्वैत गणनायक और अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सम्मेलन में यह विचार भी रखा गया कि भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विकास की जरूरतों के बीच समन्वय स्थापित करके सामाजिक समृद्धि, सांस्कृतिक संरक्षण और जिम्मेदार नेतृत्व को बढ़ावा दिया जा सकता है। राज्य सरकार का लक्ष्य धार्मिक विरासत के संरक्षण के साथ मध्य प्रदेश को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है।















