भोपाल, 24 अक्टूबर।
भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीकी शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और शिक्षक प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईटीटीटीआर), भोपाल और हरिद्वार स्थित पतंजलि के तीन संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुआ है। इसमें पतंजलि भारतीय आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान, पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन और पतंजलि विश्वविद्यालय शामिल हैं।
इस समझौते का उद्देश्य संयुक्त शैक्षणिक गतिविधियों, अनुसंधान, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और अध्ययन सामग्री के विकास को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से शिक्षा, आयुर्वेद, कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं विकसित की जाएंगी।
संयुक्त अनुसंधान और प्रशिक्षण पर जोर
इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने तकनीकी शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में एनआईटीटीटीआर के कार्यों में रुचि दिखाई। उन्होंने संयुक्त अनुसंधान और तकनीकी प्रशिक्षण उपकरणों के निर्माण में सहयोग की संभावनाओं को महत्वपूर्ण बताया।
एनआईटीटीटीआर के निदेशक प्रो. चंद्र चारू त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और वर्तमान सामाजिक आवश्यकताओं से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने इस समझौते को विरासत से नवाचार की दिशा में सार्थक पहल बताया।
प्रामाणिक अध्ययन सामग्री होगी विकसित
भारतीय ज्ञान परंपरा विभाग के अध्यक्ष डॉ. पीके पुरोहित ने कहा कि इस सहयोग के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित प्रामाणिक अध्ययन सामग्री और शिक्षण संसाधन विकसित किए जाएंगे।
कार्यक्रम में डॉ. वेदप्रिया आर्य, डॉ. रामेंद्र सिंह, डॉ. नयन मिश्रा सहित पतंजलि के विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ और अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।














