चेन्नई, 26 अक्टूबर।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन वर्ष 2029 तक देश में चार सक्रिय प्रक्षेपण केंद्रों के साथ अपनी अंतरिक्ष गतिविधियों का विस्तार करेगा। संगठन के अध्यक्ष वी. नारायणन ने चेन्नई के पास पोरूर में एक निजी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के कुलसेकरपट्टिनम में छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान के लिए दो हजार एकड़ में विशेष अंतरिक्ष केंद्र विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही श्रीहरिकोटा में तीसरा प्रक्षेपण केंद्र भी स्थापित किया जाएगा। इन सुविधाओं का उद्देश्य उपग्रह प्रक्षेपण की बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा करना है।
कुलसेकरपट्टिनम में बनने वाले अंतरिक्ष केंद्र में यानों के एकीकरण के लिए भवन, प्रक्षेपण स्थल, रेल पटरियों की व्यवस्था और टेलीमेट्री, ट्रैकिंग व कमान से जुड़ी प्रणालियां विकसित की जाएंगी।
नारायणन के अनुसार, इसरो अगले दो महीनों में गगनयान मिशन का पहला मानवरहित परीक्षण करने की योजना बना रहा है। इसके बाद अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले दो और मानवरहित परीक्षण किए जाएंगे। इन परीक्षणों में पर्यावरण नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था, चालक दल को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रणाली और अंतरिक्ष यान के आंतरिक हिस्सों की अलग-अलग दबाव, तापमान व आर्द्रता की स्थितियों में जांच होगी। इस मिशन के लिए लगभग आठ हजार जमीनी प्रयोग किए जा चुके हैं और चार चयनित अंतरिक्ष यात्री विशेष प्रशिक्षण ले रहे हैं।
उन्होंने जापान की अंतरिक्ष एजेंसी के सहयोग से चंद्रयान-5 मिशन की योजना की भी जानकारी दी। इस अभियान में 350 किलोग्राम का रोवर चंद्रमा की सतह पर 100 दिनों तक प्रयोग करेगा। नारायणन ने स्पष्ट किया कि इसरो का निजीकरण नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हजारों उपग्रहों की बढ़ती घरेलू और वैश्विक मांग पूरी करने के लिए निजी कंपनियों के साथ साझेदारी जरूरी है।














