संपादकीय
11 Mar, 2026

प्यास लगने पर कुआँ खोदने की परंपरा अग्नि सुरक्षा की अनदेखी

प्रदेश के शहरों में आगजनी की घटनाएँ फायर सेफ्टी की कमी और अव्यवस्थित संरचना उजागर करती हैं; आधुनिक उपकरण, रणनीति और जागरूकता आवश्यक हैं।

प्रदेश के कई शहरों में लगातार हो रही आगजनी की घटनाएँ यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि हमारे प्रशासनिक तंत्र में अभी भी “प्यास लगने पर कुआँ खोदने” की परंपरा गहराई से मौजूद है। जब तक कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हो जाती, तब तक न तो प्रशासन सक्रिय होता है और न ही व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की गंभीर कोशिश दिखाई देती है। लेकिन जैसे ही कोई भीषण अग्निकांड होता है, उसके बाद बैठकों का दौर, सर्वेक्षण, फाइलों की आवाजाही और नई योजनाओं की घोषणाएँ शुरू हो जाती हैं। दुर्भाग्य यह है कि कुछ समय बाद सब कुछ फिर से पुराने ढर्रे पर लौट आता है।
हाल ही में प्रदेश के कई शहरों—ग्वालियर, भोपाल, इंदौर और अन्य स्थानों—में भीषण आगजनी की घटनाएँ सामने आई हैं। इन घटनाओं ने एक बार फिर अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की वास्तविकता उजागर कर दी है। शहरों की संकरी गलियाँ, अव्यवस्थित बाजार और बिना योजना के बने भवन आग की स्थिति में बड़ी चुनौती बन जाते हैं। कई स्थानों पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ घटनास्थल तक पहुँच ही नहीं पातीं। नतीजा यह होता है कि आग पर काबू पाने में देर हो जाती है और तब तक जान-माल का भारी नुकसान हो चुका होता है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि नगर निगम, फायर ब्रिगेड और संबंधित प्रशासनिक विभागों के पास इन समस्याओं का स्थायी समाधान करने की ठोस व्यवस्था नहीं दिखाई देती। जब भी कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तब प्रशासनिक अमला सक्रिय होता है। सर्वेक्षण शुरू होते हैं, यह देखा जाता है कि किन गलियों में फायर ब्रिगेड पहुँच सकती है और कहाँ रास्ते चौड़े करने की जरूरत है। संभावित आगजनी वाले क्षेत्रों की सूची बनाई जाती है, लेकिन इन रिपोर्टों का भविष्य अक्सर फाइलों तक ही सीमित रह जाता है।
पिछले वर्ष कुछ अस्पतालों में आग लगने की घटनाओं और मरीजों की मौत के बाद सरकार ने अस्पतालों में फायर सिस्टम अनिवार्य करने के निर्देश दिए थे। इसी तरह स्कूलों, कोचिंग संस्थानों, बड़े शैक्षणिक परिसरों और व्यावसायिक बाजारों में भी अग्नि सुरक्षा उपकरणों को अनिवार्य किया गया। लेकिन इन निर्देशों के क्रियान्वयन की स्थिति बेहद कमजोर है। नगर निगम और संबंधित विभाग नियमित निरीक्षण करने में असफल साबित हो रहे हैं। कई संस्थानों में या तो फायर सिस्टम लगाए ही नहीं गए हैं या वे केवल औपचारिकता भर रह गए हैं।
समस्या केवल उपकरणों की कमी तक सीमित नहीं है। शहरों की योजना और संरचना भी बड़ी चुनौती है। कई पुराने बाजार और आवासीय क्षेत्र इतने घने और अव्यवस्थित हैं कि आपातकालीन सेवाओं का वहाँ पहुँचना मुश्किल हो जाता है। इन क्षेत्रों में न तो पर्याप्त चौड़ी सड़कें हैं और न ही पानी के स्रोतों की उचित व्यवस्था। ऐसी स्थिति में जब आग लगती है, तो आग बुझाने का काम बेहद कठिन हो जाता है।
इसके अलावा फायर ब्रिगेड विभाग की संसाधन क्षमता भी सीमित है। कई शहरों में फायर स्टेशनों की संख्या कम है, आधुनिक उपकरणों का अभाव है और कर्मचारियों की भी कमी बनी रहती है। गर्मियों के मौसम में आग लगने की घटनाएँ बढ़ जाती हैं, लेकिन इसके बावजूद पूर्व तैयारी का अभाव दिखाई देता है। यदि समय रहते उपकरणों की खरीद, कर्मचारियों का प्रशिक्षण और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर ली जाए, तो कई बड़ी घटनाओं को टाला जा सकता है।
जनता की भूमिका भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। कई बार भवन निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है। बाजारों में अवैध निर्माण और अतिक्रमण से रास्ते संकरे हो जाते हैं, जिससे आपातकालीन सेवाओं का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है। बिजली के तारों की अव्यवस्थित व्यवस्था भी आग लगने का बड़ा कारण बनती है। यदि नागरिक और प्रशासन दोनों मिलकर जिम्मेदारी निभाएँ, तो जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि आगजनी की घटनाओं के बाद सक्रिय होने की बजाय पहले से तैयारी की जाए। नगर निगम, फायर विभाग और सरकार को मिलकर एक व्यापक रणनीति तैयार करनी होगी। संवेदनशील क्षेत्रों का स्थायी सर्वे, नियमित निरीक्षण, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और सख्त नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है। साथ ही जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को भी आग से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना होगा।
यदि अब भी प्रशासन ने अपनी कार्यप्रणाली नहीं बदली, तो “प्यास लगने पर कुआँ खोदने” की यह परंपरा आगे भी जारी रहेगी और हर साल आगजनी की घटनाओं में जान-माल की क्षति होती रहेगी। समय की मांग है कि प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि सक्रिय और दूरदर्शी नीति अपनाई जाए, ताकि प्रदेश के शहर सुरक्षित बन सकें और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।
|
आज का राशिफल

इस सप्ताह आपके लिए अनुकूल समय है। पेशेवर मोर्चे पर सफलता मिलने के योग हैं। व्यक्तिगत जीवन में भी सुकून और संतोष रहेगा।
भाग्यशाली रंग: लाल
भाग्यशाली अंक: 9
मंत्र: "ॐ हं राम रामाय नमः"

आज का मौसम

भोपाल

16° / 26°

Rainy

ट्रेंडिंग न्यूज़

आईपीएल 2026 में आरसीबी की दमदार जीत से सीएसके पर 43 रन की बड़ी बढ़त

धमाकेदार बल्लेबाजी और सटीक गेंदबाजी के दम पर आरसीबी ने विशाल स्कोर खड़ा कर मुकाबले में पूरी तरह दबदबा बनाया और सीएसके को पीछे छोड़ दिया।

ग्वालियर चिड़ियाघर में सफेद बाघिन ने तीन शावकों को जन्म दिया

गांधी प्राणी उद्यान में जन्मे तीन शावकों में एक सफेद और दो रॉयल बंगाल टाइगर शामिल हैं सभी शावक स्वस्थ हैं और विशेष निगरानी में रखे गए हैं।

अमेरिका और चीन के प्रभाव से दूर स्वतंत्र वैश्विक गठबंधन बनाने की अपील

फ्रांस के राष्ट्रपति ने देशों से किसी एक महाशक्ति पर निर्भर न रहने और लोकतंत्र तथा अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित नई वैश्विक व्यवस्था बनाने का आह्वान किया।

मालदीव में जनमत संग्रह और मेयर चुनाव में सत्ताधारी दल को झटका

संवैधानिक बदलावों को जनता ने नकारा और मेयर चुनावों में विपक्ष के बेहतर प्रदर्शन से सरकार की राजनीतिक स्थिति कमजोर होती नजर आई।

रूस के ड्रोन हमलों से यूक्रेन में पांच लोगों की मौत कई घायल

रातभर चले हमलों में रिहायशी इलाकों और बाजारों को निशाना बनाया गया जिससे कई शहरों में नुकसान हुआ और सुरक्षा स्थिति और अधिक गंभीर हो गई।

राष्ट्रपति मुर्मू ने ईस्टर पर दी शुभकामनाएं, बताया करुणा और एकता का संदेश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ईस्टर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी और समाज में करुणा, क्षमा और भाईचारे का संदेश साझा किया।

राष्ट्र प्रथम का मंत्र अपनाएं, युवाओं से नशा मुक्त समाज बनाने का आह्वान

उपराष्ट्रपति ने छात्रों को राष्ट्र प्रथम की भावना अपनाने और नशामुक्त, सशक्त समाज निर्माण के लिए तकनीक व मूल्यों के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।

पीएनजी कनेक्शन की संख्या में 3.42 लाख का इजाफा

पेट्रोलियम मंत्रालय ने पीएनजी कनेक्शन की संख्या बढ़ाने और एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं, साथ ही वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा दिया है।

ईरान ने अमेरिकी ए-10 विमान को मार गिराने का दावा दिया, क्षेत्र में तनाव बढ़ा

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी ए-10 विमान मार गिराने का दावा किया और क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और सफाई को दी प्राथमिकता

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने समीक्षा बैठक में यात्रियों की सुविधा, स्टेशन की सफाई, सुरक्षा और समयपालन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया।