काठमांडू, 03 अप्रैल, 2026।
सीपीएन-यूएमएल में संसदीय दल के नेता राम बहादुर थापा ‘बादल’ के हालिया बयानों को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष उभर आया है। प्रतिनिधि सभा की गुरुवार को हुई पहली बैठक में थापा द्वारा दिए गए बयान पार्टी की स्थापित नीतियों के खिलाफ माने जा रहे हैं, जिसके बाद पार्टी नेतृत्व ने शुक्रवार दोपहर 1 बजे आपातकालीन सचिवालय बैठक बुलाने का निर्णय लिया है।
पार्टी पदाधिकारियों के अनुसार, बैठक में थापा के उन बयानों की समीक्षा की जाएगी, जिनसे वरिष्ठ नेताओं के बीच नाराजगी और आंतरिक तनाव बढ़ा है। पार्टी में एक दिन पहले ही थापा को संसदीय दल का नेता बनाए जाने पर भी कई सवाल उठ चुके हैं, और प्रतिनिधि सभा की पहली बैठक में उनके बयानों ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया।
संसदीय दल के नेता थापा ने अपने पहले संबोधन में वर्तमान जनादेश को विदेशी शक्तियों के समर्थन से प्राप्त बताया और नेपाल पुलिस व नेपाली सेना की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार नेपाल की जनता के जनादेश से नहीं बनी बल्कि पश्चिमी शक्तियों के बल पर स्थापित हुई है, जिसके लिए नेपाली सेना और बारबरा फाउंडेशन का सहयोग है। थापा का यह बयान पार्टी के स्थापित सिद्धांतों से अलग माने जा रहे हैं।
पार्टी के उपाध्यक्ष विष्णु पौडेल ने सार्वजनिक रूप से थापा के बयानों से असहमति जताई और सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि थापा के विचार पार्टी के मानदंडों के खिलाफ हैं। उन्होंने संकेत दिया कि इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर गंभीर चर्चा होगी और उचित निर्णय लिया जाएगा।
सह महासचिव योगेश भट्टराई ने भी थापा की भाषा पर कड़ी आपत्ति जताई और आपात बैठक बुलाकर उन्हें सचेत करने की मांग की। थापा समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत संसद पहुंचे हैं, लेकिन उनके बयानों से पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही बहस और जटिल हो गई है। पार्टी अध्यक्ष केपी ओली की गिरफ्तारी के बाद थापा को कार्यवाहक अध्यक्ष और संसदीय नेता बनाने का फैसला जमीनी स्तर पर भी विवादास्पद साबित हुआ है।












