कोलकाता, 17 मार्च 2026।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही राज्य में रविवार शाम से आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इस दौरान सोमवार रात चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों, मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
चुनाव आयोग की गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी राजनीतिक दल को चुनाव प्रचार के लिए सरकारी भवन, सरकारी वाहन या सरकारी संसाधनों का उपयोग नहीं करने दिया जाएगा। इसके साथ ही सरकारी धन से किसी प्रकार का प्रचार या विज्ञापन करना भी प्रतिबंधित है।
आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि कोई मंत्री अपने सरकारी कार्य और चुनाव प्रचार को एक साथ नहीं जोड़ सकेगा। चुनाव प्रचार के दौरान मंत्री सरकारी वाहन, सुरक्षा या अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
पिछले चुनावों में आचार संहिता का उल्लंघन होने की शिकायतें सामने आई थीं। इस बार आयोग ने राजनीतिक दलों और मंत्रियों को नियमों का सख्ती से पालन करने की विशेष चेतावनी दी है। किसी भी उल्लंघन की शिकायत आम नागरिक भी कर सकते हैं। इसके लिए सी-विजिल मोबाइल एप और कॉल सेंटर 1950 उपलब्ध है।
नियमों के पालन की निगरानी के लिए पांच हजार 173 फ्लाइंग स्क्वॉड और पांच हजार 200 स्टैटिक सर्विलांस टीम तैनात की गई हैं। इन टीमों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी शिकायत पर 100 मिनट के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
आयोग ने कहा है कि किसी भी रैली या सभा से पहले पुलिस को सूचना देना अनिवार्य होगा ताकि सुरक्षा और यातायात की उचित व्यवस्था हो सके। लाउडस्पीकर के उपयोग के लिए भी विशेष अनुमति लेनी होगी।
यदि कोई दल मैदान या हेलिपैड का उपयोग करना चाहता है तो चुनाव आयोग के ईसीआईनेट पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकता है। आवेदन ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर मंजूर किए जाएंगे।
चुनाव आयोग ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भी निर्देश दिया है कि वे आचार संहिता लागू करने में पूरी निष्पक्षता बरतें और सभी राजनीतिक दलों के साथ समान व्यवहार करें। किसी भी लापरवाही या पक्षपात की स्थिति में संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।












