नई दिल्ली, 02 अप्रैल।
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर मामले को लेकर गहरी नाराज़गी जताई है। अदालत ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ हुए धरने और घेराव जैसी घटनाएं बेहद गंभीर हैं और यह सीधे तौर पर न्यायपालिका को चुनौती देने जैसा है।
मुख्य न्यायाधीश ने इस घटना के बारे में कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से प्राप्त पत्र का हवाला देते हुए बताया कि पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना मिलने के बावजूद घटनास्थल पर देर से पहुंचना प्रशासन की बड़ी लापरवाही है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले में न्यायिक अधिकारी अपनी जिम्मेदारी के अनुसार काम कर रहे थे और किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अदालत ने इस घटना को सुनियोजित साजिश बताते हुए इसका उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और प्रक्रिया में बाधा डालना बताया।
इस गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह इस मामले की जांच सीबीआई या एनआईए से कराए और प्रारंभिक रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की जाए। इसके साथ ही मुख्य सचिव, डीजीपी, ज़िलाधिकारी और एसएसपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
अदालत ने इन अधिकारियों को 6 अप्रैल शाम 4 बजे ऑनलाइन उपस्थित होने का आदेश दिया है और स्पष्ट किया है कि उन्हें यह बताना होगा कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। सुप्रीम कोर्ट का यह सख्त रुख न्यायपालिका की शुचिता और कानून व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करने का संदेश देता है।


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