वॉशिंगटन, 18 अप्रैल।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने शनिवार को जानकारी दी कि ईरान के बंदरगाहों तक पहुंच रोकने के लिए लागू की गई नौसैनिक नाकेबंदी के दौरान अब तक 21 जहाजों को वापस लौटने के लिए मजबूर किया गया है। यह कार्रवाई क्षेत्र में जारी तनाव और कूटनीतिक प्रयासों के बीच की जा रही है, ताकि मौजूदा संघर्षों का पूर्ण समाधान निकाला जा सके।
सेंट्रल कमांड के अनुसार, निर्देशित मिसाइल विध्वंसक यूएसएस माइकल मर्फी अरब सागर में तैनात रहकर इस नाकेबंदी को लागू कर रहा है। 17 अप्रैल को गश्त के दौरान अमेरिकी बलों ने उन जहाजों को रोककर वापस भेजा, जो ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश या बाहर निकलने का प्रयास कर रहे थे। बताया गया कि अब तक 21 जहाज अमेरिकी निर्देशों का पालन करते हुए लौट चुके हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी समुद्री मौजूदगी को और मजबूत किया है, ताकि ईरान से जुड़े जहाजों की आवाजाही पर निगरानी रखी जा सके और आवश्यक प्रतिबंध लागू किए जा सकें।
इधर, ईरान की संसद के अध्यक्ष एमबी गालिबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ट्रम्प ने कहा था कि ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक दोनों देशों के बीच पूर्ण समझौता नहीं हो जाता।
गालिबाफ ने अपने संदेश में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली समुद्री आवाजाही पर तेहरान का सख्त नियंत्रण रहेगा और केवल निर्धारित मार्गों तथा ईरान की अनुमति से ही जहाजों को गुजरने दिया जाएगा।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में स्पष्ट किया था कि ईरान से जुड़े मामलों में नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह लागू रहेगी और यह तब तक समाप्त नहीं होगी, जब तक समझौते की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया तेजी से पूरी हो सकती है।
तेहरान द्वारा हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की घोषणा के बाद यह घटनाक्रम सामने आया है। यह कदम इजराइल और लेबनान के बीच जारी दस दिन के युद्धविराम से जुड़ा हुआ है, जिसके तहत वाणिज्यिक जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई है, हालांकि अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि ईरान पर आर्थिक और सैन्य दबाव अभी कम नहीं किया जाएगा।





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