भोपाल, 18 अप्रैल।
मध्य प्रदेश में सांपों की संख्या के वैज्ञानिक आकलन के लिए एक अनोखी पहल को हरी झंडी मिल गई है। राज्य वन विभाग ने भारतीय वन्यजीव संस्थान को प्रदेश में इस विशेष अध्ययन के लिए टीम भेजने की अनुमति प्रदान कर दी है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, औपचारिक स्वीकृति मिलने के बाद संस्थान की टीम जल्द ही राज्य का दौरा करेगी और विभिन्न संरक्षित क्षेत्रों में अध्ययन कार्य प्रारंभ करेगी। इस परियोजना के लिए विभाग द्वारा पूर्व में ही धनराशि आवंटित की जा चुकी है।
बताया गया है कि यह पहल न केवल देश बल्कि विश्व स्तर पर भी अपने प्रकार की पहली वैज्ञानिक गणना मानी जा रही है। अब तक इस स्तर पर सांपों की आबादी का कोई व्यवस्थित और व्यापक आकलन नहीं किया गया है।
इस योजना का प्रस्ताव अप्रैल 2025 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा वन संरक्षण पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान रखा गया था। इसका उद्देश्य विशेष रूप से महाकौशल क्षेत्र में बढ़ते सर्पदंश मामलों को समझना और उन पर नियंत्रण के उपाय खोजने के लिए सांपों की संख्या और वितरण का अध्ययन करना है।
मुख्यमंत्री ने उस समय यह भी उल्लेख किया था कि जहां अन्य वन्यजीवों की नियमित गणना होती है, वहीं सांप अब तक इस प्रक्रिया से लगभग बाहर ही रहे हैं। इस अध्ययन से सर्प संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए आधारभूत जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।
वन विभाग को कुछ दिन पहले ही भारतीय वन्यजीव संस्थान की ओर से क्षेत्रीय अनुमति के लिए औपचारिक पत्र प्राप्त हुआ था। अब अंतिम मंजूरी मिलने के बाद टीम जल्द ही जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण शुरू करेगी।



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