बेरूत, 18 अप्रैल।
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने शुक्रवार को कहा कि देश में लागू युद्धविराम को स्थायी समझौतों में बदला जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका संकेत इजराइल के साथ संभावित शांति समझौते की ओर है या नहीं।
यह संबोधन उस युद्धविराम के बाद उनका पहला सार्वजनिक वक्तव्य था, जिसे अमेरिका की मध्यस्थता में इजराइल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच छह सप्ताह तक चले संघर्ष को समाप्त करने के लिए लागू किया गया। समझौते के प्रावधानों के अनुसार, इजराइल और लेबनान के बीच प्रत्यक्ष वार्ता के जरिए दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
औन ने इस युद्धविराम को संभव बनाने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और क्षेत्रीय देशों की भूमिका के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि अब देश एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां युद्धविराम से आगे बढ़कर स्थायी समझौतों की दिशा में काम किया जाएगा, जिससे जनता के अधिकार, देश की एकता और संप्रभुता सुरक्षित रह सके।
हिजबुल्लाह ने हालांकि इजराइल के साथ प्रत्यक्ष वार्ता का विरोध किया है और उसके नेताओं ने सरकार के इस निर्णय की आलोचना की है। औन ने बिना इजराइल का नाम लिए कहा कि ये वार्ताएं न तो कमजोरी का संकेत हैं और न ही किसी प्रकार का समझौता या पीछे हटना।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य लेबनान पर हो रहे हमलों को रोकना और देश की सीमा से इजराइली सैनिकों की वापसी सुनिश्चित करना है। इजराइल के रक्षा मंत्री ने कहा है कि दक्षिणी लेबनान में उन घरों को गिराने की कार्रवाई जारी रहेगी, जिनका उपयोग हिजबुल्लाह द्वारा किए जाने का आरोप है।
औन ने कहा कि वह इन फैसलों की पूरी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं और अपने देश की सुरक्षा, जनता की रक्षा और भूमि की स्वतंत्रता के लिए हर आवश्यक कदम उठाएंगे। इसी बीच, ट्रम्प ने दोनों देशों के बीच वार्ता के लिए औन और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को व्हाइट हाउस आमंत्रित करने की बात कही है, हालांकि इसकी तिथि अभी तय नहीं हुई है।
अपने संबोधन में औन ने ईरान और हिजबुल्लाह का नाम लिए बिना कई संकेत दिए और कहा कि अब लेबनान किसी के प्रभाव में नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि देश अब किसी के खेल का हिस्सा या युद्ध का मैदान नहीं बनेगा।





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