वाशिंगटन/तेहरान, 21 अप्रैल
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनावपूर्ण संबंधों के बीच एक बार फिर कूटनीतिक प्रक्रिया को लेकर स्थिति जटिल होती नजर आ रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया है कि इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता में शामिल होने को लेकर ईरान पर किसी प्रकार का दबाव नहीं है। इस वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा किया जाना प्रस्तावित है। ईरान की ओर से पहले ही संकेत दिए जा चुके हैं कि वह फिलहाल इस वार्ता में भाग लेने की स्थिति में नहीं है।
इसी बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव और अधिक बढ़ गया है। अमेरिकी कार्रवाई के तहत एक ईरानी जहाज को रोककर जब्त किए जाने की घटना के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। इसके बाद ईरान ने नाकेबंदी और निर्यात प्रतिबंधों के बीच किसी भी कूटनीतिक वार्ता से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है। लगातार सात सप्ताह से जारी इस गतिरोध के कारण समाधान की दिशा अस्पष्ट बनी हुई है। युद्धविराम समाप्त होने और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से वैश्विक बाजारों में असर देखने को मिला है।
रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने कहा कि समझौते के लिए ईरान पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान से संवर्धित यूरेनियम की प्राप्ति एक लंबी और जटिल प्रक्रिया होगी। उनके अनुसार पहले की सैन्य कार्रवाई के बाद हालात काफी बदल चुके हैं, जिससे यह प्रक्रिया और कठिन हो गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक विशेष अभियान के तहत ईरान के कई परमाणु ठिकानों को निष्क्रिय किया गया था।
अमेरिका का आरोप है कि ईरान इस यूरेनियम का भंडारण परमाणु हथियार निर्माण की दिशा में कर रहा है, जबकि ईरान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। वहीं ईरान का कहना है कि किसी भी तरह की स्थानांतरण योजना स्वीकार नहीं की जाएगी। दूसरी ओर इजराइली पक्ष ने भी आरोप लगाया है कि पिछले संघर्ष के बाद ईरान ने परमाणु गतिविधियों को तेज किया है।
ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि ईरान वार्ता से दूर रहता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। साथ ही उन्होंने यह दावा किया कि ईरान किसी न किसी स्तर पर वार्ता के लिए बाध्य होगा। अमेरिकी पक्ष की ओर से शांति वार्ता के संभावित अगले दौर के लिए वरिष्ठ प्रतिनिधियों के पाकिस्तान जाने की भी जानकारी दी गई है।
ईरान की संसद के अध्यक्ष ने अमेरिका को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि जब तक किसी प्रकार का खतरा बना रहेगा, तब तक कोई वार्ता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका दबाव और नाकेबंदी के जरिए वार्ता को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रहा है।
इसी बीच ईरान ने अपने मालवाहक जहाज और चालक दल को रिहा करने की भी मांग उठाई है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा गया है।










