एक जिले में प्रभारी मंत्री और जिला मुखिया के बीच ठनी हुई है। नतीजा—जनता बीच में पिस रही है। दौरे पर आते माननीय, पर मुखिया को तवज्जो नहीं; मुखिया नियमों की दुहाई देते हैं, माननीय अपनी। शिकायतें भोपाल से दिल्ली तक पहुंचीं, पर सुनवाई नहीं। संदेश साफ है—“तुम पांच साल के, हम चालीस साल के।” बीच में जो है, वह जनता है—जिसके लिए न समय है, न समाधान।












