नई दिल्ली, 02 अप्रैल 2026।
मध्यप्रदेश के दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को बैंक धोखाधड़ी मामले में राऊज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज दिग्विनय सिंह ने तीन साल की सजा सुनाई है। अदालत ने एक अप्रैल को उन्हें दोषी करार दिया था।
कोर्ट ने इस मामले में रघुवीर शरण प्रजापति को भी दोषी पाया। राजेंद्र भारती को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत सजा दी गई। इस मामले में उनके साथ आरोपित रही उनकी मां सावित्री श्याम पहले ही निधन हो चुकी थीं। मामला २४ अगस्त १९९८ का है, जब सावित्री श्याम ने जिला सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक में १३.५ फीसदी ब्याज दर पर दस लाख रुपये का फिक्स्ड डिपॉजिट कराया था।
यह फिक्स्ड डिपॉजिट सावित्री श्याम ने अपने ट्रस्ट “श्री श्याम सुंदर श्याम जन सहयोग एवं सामाजिक विकास संस्थान” के नाम कराया था, जिसे उनके पति श्याम सुंदर श्याम ने गठित किया था। आरोप है कि सावित्री श्याम ने १९९९ से प्रत्येक वर्ष एक लाख ३५ हजार रुपये ब्याज लेना शुरू किया और यह प्रक्रिया २०११ तक चली। फिक्स्ड डिपॉजिट की शर्तों का उल्लंघन करके ब्याज लेने का यह सिलसिला १३ वर्षों तक चला।
अदालत के अनुसार राजेंद्र भारती ने बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के निदेशक पद पर रहते हुए बैंक कर्मचारियों पर दबाव बनाकर यह ब्याज राशि अपनी मां को दिलवाई। इस दौरान बैंक के रसीदों, खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट प्रमाण पत्रों में छेड़छाड़ कर तीन साल के डिपॉजिट की अवधि को १० और १५ साल तक बढ़ा दिया गया, ताकि अधिक समय तक उच्च ब्याज दर से भुगतान किया जा सके।
इस मामले में शिकायतकर्ता बैंक ने २९ जुलाई २०१५ को मध्यप्रदेश में केस दर्ज कराया था। शुरुआत में मामला केवल राजेंद्र भारती और उनकी मां के खिलाफ था, बाद में प्रजापति को भी आरोपी बनाया गया। राजेंद्र भारती ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर मामले की सुनवाई दिल्ली में स्थानांतरित करने की मांग की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई मध्यप्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित कर दी।












