नई दिल्ली, 27 मार्च।
भारत ने विश्व व्यापार संगठन में सदस्य देशों से विवाद निपटान प्रणाली को पूरी तरह से कार्यशील बनाने और प्रभावी सुधार लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। वर्तमान में यह व्यवस्था निष्क्रिय है, जिससे देशों को विवादों के त्वरित समाधान से वंचित होना पड़ रहा है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सुधार पारदर्शी, समावेशी और सदस्य-संचालित प्रक्रिया के तहत होने चाहिए तथा विकास को केंद्र में रखा जाना चाहिए। गोयल 26 मार्च से कैमरून के याउंडे में आयोजित डब्ल्यूटीओ के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन का नेतृत्व कर रहे हैं।
गोयल ने ई-कॉमर्स व्यापार पर सीमा शुल्क रोक को लेकर कहा कि इसके निरंतर विस्तार पर सावधानीपूर्वक पुनर्विचार आवश्यक है। उन्होंने बताया कि निष्क्रिय विवाद निपटान प्रणाली ने सदस्य देशों को उनके अधिकारों से वंचित कर दिया है और इसे स्वचालित तथा बाध्यकारी बनाया जाना चाहिए।
वर्तमान विवाद निपटान व्यवस्था 2009 से ठीक तरह से काम नहीं कर रही है क्योंकि अमेरिका ने अपीलीय निकाय में नियुक्तियों में बाधा डाली है। भारत ने सीमा शुल्क स्थगन के दायरे पर चर्चा की जरूरत पर बार-बार बल दिया है क्योंकि यह राजस्व पर प्रभाव डालता है।
गोयल ने कृषि और मछली पालन पर भी टिप्पणी की। उन्होंने खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक भंडारण, विशेष सुरक्षा उपाय और कपास पर स्थायी समाधान जैसे लंबित मुद्दों को प्राथमिकता से निपटाने की जरूरत बताई। इसके अलावा भारत व्यापक मत्स्य पालन सब्सिडी समझौते पर चर्चा के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि गरीब मछुआरों की आजीविका सुरक्षित रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि डब्ल्यूटीओ में बहुपक्षीय परिणाम आम सहमति पर आधारित होने चाहिए और संगठन को वैश्विक व्यापार का केंद्र बनाए रखने के लिए सुधार करना चाहिए। इस सुधार प्रक्रिया में विकास, समानता, समावेश और कमजोर वर्गों के हितों की सुरक्षा को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
एमसी14 के पहले दिन गोयल ने कैमरून के प्रधानमंत्री डायोन न्गूटे जोसेफ और डब्ल्यूटीओ की महानिदेशक से द्विपक्षीय बैठकें कीं। इसके अलावा वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने चिली, पराग्वे, अमेरिका, नेपाल, फिलीपींस, सऊदी अरब, यूरोपीय संसद, मेक्सिको, पेरू, रूस, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं, जिसमें एमसी14 के एजेंडे और व्यापार संबंधों को सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई।











