जापान, 20 अप्रैल।
जापान के उत्तरी तट पर सोमवार शाम आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद जारी की गई सुनामी की चेतावनी को प्रशासन ने अब वापस ले लिया है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (जेएमए) के अनुसार, भूकंप का केंद्र प्रशांत तट पर स्थित इवाते प्रान्त के समुद्र में था, जिसने भारतीय समयानुसार दोपहर लगभग 1:23 बजे (स्थानीय समयानुसार शाम 4:53 बजे) दस्तक दी। इस झटके का असर इतना व्यापक था कि केंद्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर राजधानी टोक्यो में भी इमारतें काफी देर तक हिलती रहीं।
भूकंप के तुरंत बाद अधिकारियों ने 3 मीटर (10 फीट) तक ऊंची लहरें उठने की आशंका जताते हुए रेड अलर्ट जारी किया था। कंपन के लगभग दो घंटे बाद तटीय क्षेत्रों में 80 सेंटीमीटर तक ऊंची सुनामी की लहरें दर्ज की गईं, जिसके बाद चेतावनी के स्तर को घटाकर 'सुनामी एडवाइजरी' कर दिया गया। जेएमए ने शुरुआत में तटीय और नदी किनारे के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को तत्काल ऊंचे स्थानों या सुरक्षित इमारतों में शरण लेने के निर्देश दिए थे। एजेंसी ने आगाह किया था कि सुनामी की लहरें बार-बार आ सकती हैं, इसलिए लोग तब तक सुरक्षित स्थानों पर रहें जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य न हो जाए।
सार्वजनिक प्रसारक एनएचके द्वारा प्रसारित फुटेज में इवाते के बंदरगाहों पर तत्काल किसी बड़े नुकसान के संकेत नहीं मिले हैं। प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एक संकट प्रबंधन टीम का गठन किया है और भूकंप के प्रभाव का आकलन शुरू कर दिया है। पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने नागरिकों से सुरक्षित स्थानों पर बने रहने की अपील की और बताया कि प्रशासन अभी भी जान-माल के नुकसान की पुष्टि करने में जुटा है।
जापान भौगोलिक रूप से प्रशांत महासागर के "रिंग ऑफ फायर" पर स्थित होने के कारण दुनिया के सबसे अधिक भूकंप संभावित देशों में गिना जाता है। यहां हर साल करीब 1,500 भूकंप आते हैं, जो दुनिया की कुल भूकंपीय गतिविधियों का लगभग 18 प्रतिशत है। आज की इस घटना ने साल 2011 में आए भीषण भूकंप और सुनामी की यादें ताजा कर दी हैं, जिसमें हजारों लोगों की जान गई थी और फुकुशिमा परमाणु आपदा हुई थी। हाल के वर्षों में 'नानकाई ट्रफ' में भी बड़े भूकंप का खतरा बना हुआ है, जिसके मद्देनजर 2024 और दिसंबर में दुर्लभ 'मेगाक्वेक' एडवाइजरी भी जारी की गई थी।









