वृंदावन, 24 मार्च।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के विराट व्यक्तित्व में उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम का महत्वपूर्ण योगदान है, क्योंकि बृज में पराक्रम करने के बाद उन्होंने शिक्षा ग्रहण करने के लिए इस आश्रम का मार्ग अपनाया। इस संबंध में उन्होंने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के वृंदावन स्थित जीवनदीप आश्रम के लोकार्पण कार्यक्रम में भाग लिया और कार्यक्रम को संबोधित किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश का मथुरा-गोकुल-उज्जैन से जुड़ा हुआ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध सनातन धर्म के विचार को संरक्षित करने और उसका प्रचार-प्रसार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। कार्यक्रम में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, जूना अखाड़ा महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्र आनंद गिरि, महामंडलेश्वर अवधेशानंद जी, साध्वी ऋतंभरा सहित समस्त संत वृंद और बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों द्वारा हनुमान चालीसा की प्रस्तुति के साथ हुई।
मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का उल्लेख करते हुए जीवनदीप आश्रम में उपस्थित संत वृंद को उज्जैन आने का आमंत्रण दिया। उन्होंने स्वामी यतींद्र आनंद गिरि जी की समाज सेवा और आध्यात्मिक यात्रा की सराहना की और कार्यक्रम में पधारे अतिथियों के साथ "सनातन धर्म और जीवन दर्शन" पुस्तक का विमोचन किया।

सरसंघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि विश्व के कई देशों में व्यवस्था अस्थिर हो रही है, लेकिन सनातन धर्म-संस्कृति विपरीत परिस्थितियों में भी गरिमा के साथ स्थापित है। उन्होंने मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में भारती ताई द्वारा गरीब बच्चों के लिए संचालित विद्यालय की सराहना की।
पद्मभूषण से सम्मानित साध्वी ऋतंभरा ने जीवनदीप आश्रम के वृंदावन में भव्यता बढ़ाने और मन की आंतरिक बाधाओं को पार करके लक्ष्य की प्राप्ति पर जोर दिया। बिहार और केरल के पूर्व राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने आश्रम को ज्ञान संरक्षण और संवर्धन का बड़ा केंद्र बनाने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला और संतों के जनकल्याण कार्य की सराहना की।












