नई दिल्ली, 24 मार्च।
पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ बैठक कर भारत की रक्षा तैयारियों और हाल की वैश्विक सुरक्षा घटनाओं का मूल्यांकन किया। बैठक में रक्षा मंत्री ने कहा कि यह संघर्ष केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।
बैठक में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के चेयरमैन डॉ. समीर कामत, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह, सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी समेत शीर्ष अधिकारी शामिल थे। बैठक में उन्होंने पश्चिम एशिया की बदलती सुरक्षा परिस्थितियों और होर्मुज जलमार्ग पर व्यापार बाधाओं पर चर्चा की।
रक्षा मंत्री ने भारत की रक्षा तैयारियों का आकलन करते हुए कहा कि अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। इसके जवाब में ईरान ने कई खाड़ी देशों में अमेरिकी और इजराइली संपत्तियों को निशाना बनाया, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में इस घटनाक्रम और भारत पर उनके प्रभाव की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा कि यह संकट न केवल आर्थिक और सुरक्षा बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने राज्यसभा में भी इसे गंभीर मुद्दा बताया।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि यह इलाका भारत के वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण ट्रेड रूट है और युद्ध के कारण कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। उनका कहना था कि इस संघर्ष का जल्द समाधान ढूंढना सभी देशों के लिए जरूरी है, ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सामान्य जीवन पर इसका बुरा प्रभाव कम किया जा सके।











