एक्सक्लूसिव
14 Apr, 2026

लोकतांत्रिक संस्थाएं संवाद और रचनात्मक बहस से ही मजबूत होती हैं : उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली में आयोजित स्मृति व्याख्यान में उपराष्ट्रपति ने लोकतांत्रिक संस्थाओं में संवाद और रचनात्मक बहस को आवश्यक बताते हुए विकसित भारत के लिए संवैधानिक मूल्यों पर आधारित सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।

नई दिल्ली, 14 अप्रैल

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि लोकतांत्रिक संस्थानों के सुचारु संचालन के लिए संवाद, बहस और रचनात्मक चर्चा अनिवार्य हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसदीय कार्यवाही का लक्ष्य निर्णय तक पहुंचना होना चाहिए, न कि व्यवधान पैदा करना।

बी.आर. आंबेडकर जयंती के अवसर पर डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित द्वितीय डॉ. आंबेडकर स्मृति व्याख्यान में उन्होंने “डॉ. आंबेडकर एक राष्ट्र निर्माता : विकसित भारत की ओर पथ” विषय पर संबोधन दिया। इससे पूर्व उन्होंने डॉ. आंबेडकर को पुष्पांजलि अर्पित की।

संवैधानिक नैतिकता के महत्व को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने राज्यसभा के सभापति के रूप में अपने अनुभवों पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में कार्यवाही संवाद, विचार-विमर्श और रचनात्मक चर्चा के माध्यम से आगे बढ़नी चाहिए तथा बहस का परिणाम बाधाओं के बजाय निर्णय होना चाहिए।

उन्होंने डॉ. आंबेडकर को आधुनिक भारत के महान निर्माताओं में से एक बताते हुए कहा कि उनके विचार आज भी राष्ट्र को दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन की कुंजी बताते हुए कहा कि वास्तविक स्वतंत्रता शिक्षा से ही प्राप्त होती है।

संविधान निर्माण में डॉ. आंबेडकर की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि व्यापक विचार-विमर्श के बाद उनके नेतृत्व में ऐसा संविधान बना, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों पर आधारित है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन उसका समाधान केवल सकारात्मक और शालीन संवाद के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने संवैधानिक नैतिकता और तथ्यपूर्ण चर्चा को लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला बताया।

उन्होंने सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य के लिए समावेशी और न्यायपूर्ण विकास अनिवार्य है। साथ ही उन्होंने लैंगिक समानता पर डॉ. आंबेडकर के विचारों को याद करते हुए महिला सशक्तिकरण को सामाजिक प्रगति का महत्वपूर्ण मानक बताया।

उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के लिए संवैधानिक मूल्यों से प्रेरित सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई और कहा कि ऐसा भारत समावेशी, न्यायपूर्ण, नवाचारयुक्त और लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।

डॉ. आंबेडकर से जुड़े पंचतीर्थ के विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ये स्थल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के स्थायी स्रोत हैं। अंत में उन्होंने नागरिकों से न्यायपूर्ण और समावेशी समाज के निर्माण में एकजुट होकर योगदान देने की अपील की।

कार्यक्रम में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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