27 मार्च, नई दिल्ली
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की पर्याप्त उपलब्धता की पुष्टि की है। मंत्रालय के एलपीजी नियंत्रण आदेश के लागू होने के बाद घरेलू रिफाइनरी उत्पादन में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अब प्रतिदिन उत्पादन 50 टीएमटी तक पहुँच गया है, जो देश की कुल आवश्यकता का 60 प्रतिशत से अधिक है, जबकि कुल दैनिक मांग लगभग 80 टीएमटी है। इसके परिणामस्वरूप शुद्ध आयात की आवश्यकता केवल 30 टीएमटी रह गई है।
मंत्रालय ने कहा कि अतिरिक्त रूप से अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से 800 टीएमटी एलपीजी कार्गो पहले ही सुरक्षित हैं और भारत के 22 एलपीजी आयात टर्मिनलों पर पहुंच रहे हैं। यह संख्या 2014 में मौजूद 11 टर्मिनलों की तुलना में दोगुनी है। लगभग एक महीने की पूरी आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित की जा चुकी है और अतिरिक्त खरीद के प्रयास जारी हैं।
तेल कंपनियां प्रतिदिन 50 लाख से अधिक सिलेंडर सफलतापूर्वक वितरित कर रही हैं। उपभोक्ताओं द्वारा घबराहट में ऑर्डर बढ़ने के कारण सिलेंडर की मांग 89 लाख तक पहुँच गई थी, जो अब सामान्य स्थिति में वापस 50 लाख रह गई है। जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए राज्य सरकारों से समन्वय कर वाणिज्यिक सिलेंडरों का आवंटन 50 प्रतिशत बढ़ाया गया है।
साथ ही, राज्य सरकारों के पूर्ण सहयोग से पाइपलाइन द्वारा प्राकृतिक गैस (पीएनजी) का वितरण भी बढ़ाया जा रहा है। भारत दैनिक जरूरत के 191 मिलियन मीट्रिक घन मीटर में से 92 मिलियन मीट्रिक घन मीटर घरेलू रूप से उत्पादन करता है, जिससे एलपीजी की तुलना में आयात पर निर्भरता कम है। शहरी गैस वितरण क्षेत्र वर्ष 2014 में 57 से बढ़कर अब 300 से अधिक हो गए हैं।
घरेलू पीएनजी कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ से अधिक हो चुके हैं। मंत्रालय ने कहा कि पीएनजी को बढ़ावा देने का उद्देश्य एलपीजी की कमी नहीं है। एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है और पीएनजी भारतीय घरों के लिए किफायती, सुविधाजनक और स्वच्छ विकल्प है।
मंत्रालय ने दोहराया कि देश में एलपीजी की स्थिति पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। सभी रिटेल ईंधन आउटलेट्स में पर्याप्त आपूर्ति मौजूद है। नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे जानबूझकर फैलाए जा रहे भ्रामक और सुनियोजित प्रचार से भ्रमित न हों।








